वाणिज्य कर विभाग में अभी तक बने हुए हैं लुटेरे - News Vision India

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31 Mar 2018

वाणिज्य कर विभाग में अभी तक बने हुए हैं लुटेरे


वाणिज्यिक कर आयुक्त कार्यालय इंदौर में हो रहे भ्रष्टाचार ( करोड़ो का घाटा हो रहा राज्य सरकार हो हर वर्ष ) पर बड़ा खुलासा जल्दी : जाँच जारी 
उपायुक्त कार्यालय जबलपुर संभाग क्र में पदस्त नारायण मिश्र की करोड़ो की संपत्ति पर जल्द खुलासा होगा खुद के और बेटे के नाम पर खरीदी है संपत्तिया,  जाँच जारी 

 कार्यालय उपायुक्त की कुर्सी पर हक़ से बैठ रहे हैलूटने बेचने का मिला है अधिकार,  भ्रष्टाचारी पर  आयुक्त PAWAN KUMAR SHARMA IAS इंदौर कार्यालय में आंखे मूंदे बैठे देख रहे,   शिकायत कर दी है दरकिनार , अगली कार्यवाही की जिम्मेदारी प्रमुख सचिव मनोज श्रीवास्तव पर निर्भर करती है, जिनसे उनके कार्यालय में अंतिम चर्चा उपरान्त सभी प्रमाणिक दस्तावेज माध्यम मेल के सुपुर्द किये गए हैअब इस भ्रष्टाचारी पर शिकंजा कसना लगभग तय है,  साथ ही प्राथमिकी दर्ज करने की अनुमति हेतु अधीनीयम अनुसार आवेदन दायर हैअधिकारी ना ही सही,  आवेदक ही दर्ज करावा सके प्रकरण.     भ्रष्टाचार से सम्बंधित यह प्रकरण भारतीय दंड विधान की धारा 467, 468, 471, व् भ्रष्टाचार प्रतिषेद अधीनीयम की धारा 13-1-डी, 13-2 के तहत दर्ज होने की सम्भावना शुरुवाती जाँच में हैजिसके प्रमाण जुटाने में वर्तमान सहा आयुक्त वाणिज्यिक कर वृत्त को आवेदन दिया गया हैकार्यवाही जारी हैदस्तावेज मिलते ही प्रकरण दर्ज होगा,         

संपूर्ण विश्व में चरित्रहीनता में सबसे घिनौना अगर कोई व्यवसाय है जो समूचे मानव समाज को शर्मिंदगी का एहसास दिलाता है वह है वैश्यावृत्ति’ ठीक उसी प्रकार की समतुल्य जीवनशैली होती है उस भ्रष्ट अधिकारी की जिसने बेरोजगारी का जीवन काटते समय बतौर पब्लिक सर्वेंट पूरी कर्तव्य निष्ठा और ईमानदारी के साथ जनहित में और लोकहित में काम करने की शपथ ली हुई होती है और उसके बाद वह पूरे समाज को शर्मिंदगी का एहसास उसी वेश्यावृत्ति के अंदाज में रिश्वत खाकर और अपने विरासत में पाई हुई दुकान समझकर उस कार्यालय को अपनी व्यक्तिगत अय्याशियां पूरी करने के लिए अपने हिसाब से संचालित करता है

अपने अधिकारों के दुरुपयोग की पराकाष्ठा को पार कर चुके इन अधिकारी के विरुद्ध किन शब्दों में और क्या तारीफ करनी चाहिए यह आज के कवियों की भी काबिलियत के परे हैफ़िलहाल भ्रष्टाचार से सम्बंधित हर वरिष्ठ अधिकारी को शिकायत मंत्रालय में प्रस्तुत कर दी गयी हैकार्यवाही की जारी  हैजिस प्रकार होली और दिवाली के समय पुलिस विशेष मुहिम के तहत अपराधियों को और  टुच्चो को  शांति व्यवस्था बनाए रखने हेतु केंद्रीय कारागार में बंद कर देती है ठीक उसी प्रकार एक मुहिम की आवश्यकता है इस प्रकार के धुर अपराधियों पर कार्यवाही करने की

    अधीनस्त पब्लिक  इनफार्मेशन अधिकारीयों पर बना रहा है अनावश्यक दबावभ्रष्टाचार सम्बन्धी जानकारी देने से रोके जाने के खुलकर  प्रयास जारी  है,  बिना किसी पर्याप्त आधार के सूचना अधिकार 2005 के आवेदन  खुद भी कर रहा है ख़ारिज  और अधीनस्तो को भी दबाव बनाया जा कार करवा रहा है ख़ारिज

                पहले खुद के कार्यालय से सम्बंधित जानकारी के आवेदन अन्य अधिकारियो को हस्तांतरित कर देता हैजिससे ये भ्रष्ट उपायुक्त खुद के कार्यालय अंतर्गत जानकारी प्रदान करने की जिम्मेदारी से बचने का प्रयास करता हैफिर उसी प्रकरण की अपील खुद ख़ारिज करने जैसी भूमिका बनाता हैजिसकी अपील इंदौर स्थित प्रथम लोक सूचना अधिकारी के समक्ष होनी चाहिएउसकी अपील खुद सुनने की भूमिका बनाने में बारम्बार प्रयासरत है खैर इसकी शिकायत लोक सूचना आयोग आयुक्त महोदय को भी की गयी हैभ्रष्टाचार की इस कड़ी में नए नए अधिकारी जुड़ते चले जा रहे हैविरासत में प्राप्त की गयी दूकान को अधिकारिक रूप से संचालित करने में पारंगत हो चुके है भ्रष्ट उपायुक्त नारायण मिश्रपर अब शेष रह गया है स्वागतनिलंबन आदेश काअब इस बेशर्मी की कीमत व्यापारी और समाज कब तक चुकाएगा देखना शेष हैअंग्रेज चले गए,  लूटेरे यही छोड़ गए   

              

वाणिज्यिक कर विभाग के आयुक्त के द्वारा एक अधिसूचना जारी की गई थी आज से 5 वर्ष पहले जिसमें यह कहा गया था कि रिटायर कर्मचारियों का कार्यालय परिसर में प्रवेश निषेध होगा बावजूद उसके इस आदेश की अवमानना करते हुए इस भ्रष्ट अधिकारी नारायण मिश्र के द्वारा रिटायर कर्मचारियों से उन्हीं की हैंडराइटिंग में पुराने लंबित कार्य संधारित किए जा रहे हैं जिससे यह हो चुके भ्रष्टाचार को नियंत्रित करने का एक प्रयास है

जबलपुर संभाग के अंतर्गत कई ऐसी प्राइवेट लिमिटेड तथा लिमिटेड कंपनियां पंजीकृत हैं जिनके टर्नओवर  हजारों करोड़ के आसपास होते हैं जिनके  द्वारा कर का भुगतान अनियमित रूप से किया जाता है  तथा आंशिक अवैधानिक भी होता है इन सभी लंबित  प्रकरणों के  असेसमेंट  निर्धारित अवधि के अंतर्गत असेसमेंट हो जाना चाहिए और कर की गणना है तथा आगत कर दावा और टीडीएस सर्टिफिकेट का मिलान असेसमेंट के समय किया जाना उपायुक्त क्रमांक 1 जबलपुर के द्वारा किया जाना है जो की एक सामान्य प्रक्रिया है जो की जा रही भी है कि नहीं सही समय पर इसकी कोई जानकारी नहीं रखता ना ही इनके द्वारा सूचना अधिकार के तहत चाहे जाने पर इनके द्वारा दी जाती हैभ्रष्टाचार का सीधा मतलब है वाणिज्यिक कर विभाग,  

फिलहाल भारत देश बड़े-बड़े बैंक होटलों से जूझ रहा है अगर एक नजर इस तरफ भी डाली जाए तो राज्य शासन को करोड़ों रुपए की क्षति कारित करने वाले ऐसे भ्रष्ट अधिकारियों के विरुद्ध अनुशासनिक और दंडात्मक कार्यवाही की जा सकेगी और भ्रष्टाचार पर लगाम लगाने हेतु बड़ी कारगर साबित होगी.

फिलहाल आवेदक के आवेदन पर इनके द्वारा जो जानकारियां नहीं दी गई हैं उनकी अगली बार की जा रही है और स्पष्ट जानकारी प्राप्त करने का प्रयास किया जा रहा है


पूर्व में निलंबित वाणिज्यिक कर उपायुक्त ओम प्रकाश वर्मा के सम्बन्ध में प्रकाशित खबरे जिसने विभाग पर भ्रष्टाचार का प्रकाश डाला और निलंबित हुआ

1.   पैसा दो न्याय लोवाणिज्यिक कर विभाग  जबलपुर में बिना लेनदेन के कोई काम नहीं
2.   वाणिज्यिक कर विभाग के पी. वर्मा उर्फ़ ओमप्रकाश का एक और केस सामने आया                                              
3.   वाणिज्यिक कर उपायुक्त पीवर्माउर्फ़ ओमप्रकाशअंततः निलंबित
4.  न्याय विक्रेता निलंबित उपायुक्त पर कार्यवाही लंबित वाणिज्यिक कर विभाग मध्य प्रदेश
5. रोग मुक्त हुआ विभागभ्रष्टाचारी सेवा से निवृत्त हुआनिलंबन काल में

वर्तमान में एक नया भ्रष्टाचारी वाणिज्यिक कर विभाग में उभर कर सामने आया हैजिसका नाम है नारायण मिश्र, जिसने करोडो के 49 फॉर्म बेच डाले
नाम के नारायण , काम के भस्मासुर

1.       50 करोड़ का घोटालावाणिज्य कर विभाग का फार्म-49 घोटालाजबलपुर मध्य प्रदेश
2.       घोटालेबाज उपायुक्त "नारायण मिश्रपर कार्यवाही शुरूवाणिज्यिक कर विभागमध्य प्रदेश



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