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10 Mar 2018

SGTP में सिर्फ़ दो दिनों का कोयला

SGTP Coal Crises Fake Or Real

SGTP में  सिर्फ़ दो दिनों का कोयला  

कृत्रिम संकट तो नहीं?

यार्ड में लाखों टन भौतिक कोयले का स्टाक

संजय गांधी ताप बिजली ग्रह जो वर्तमान में प्रदेश का सबसे बड़ा ताप बिजलीघर है जो कोयले के कृत्रिम संकट से जूझ रहा है और बकौल जेनको की माने तो मात्र कागजों में दो दिनों के बिजली घर की पांचों इकाइयों को चलाने लायक कोयला है रोजाना लगभग 19 हजार से 20 हजार मेट्रिक टन कोयला खपत हो रहा है जिसकी पूर्ति SECL की कोरबा और रीवा कोरिया क्षेत्र की  कोयला खदानों से रेल मार्ग से होती है।

संजय ताप ग्रह के कोल् स्टाक यार्ड में कोयले के  पहाड़ जैसे स्टाक को कोई भी देख सकता है परंतु यहां के कोल मैनेजमेंट के बड़े चालाक अधिकारी जो कोयले के काले खेल में माहिर हैं स्टाक में कोयले की कमी का ढिंढोरा  पीट पीट कर ऊर्जा मंत्रालय और जेनको के आँखों में झोंकने का कारनामा लम्बे समय से करते चले आ रहे हैं? विदित हो कि 15 सितम्बर 2017 को SGTP में मात्र 8800 मेट्रिक  कोयले का स्टाक दिखाया गया , जबकि 210 मेगावाट की 4 और 500 मेगावाट की एक इकाई के बंकरों की क्षमता 27 हजार मैट्रिक टन है और यदि कोयला बंकरो में था तो ग्राउंड स्टाक पूरी तरह खाली साफ होना चाहिए पर उस दिन पूरे यार्ड में कोयले के पहाड़ों जैसा स्टाक रहा और यदि बंकर खाली रहे और कोयला स्टाक यार्ड में रहा तो क्या हवा से  चल रही यूनिटों से बिजली पैदा हुई??
  
आजकल SGTP में प्रति यूनिट कोयले की खपत 650 ग्राम आरही है वर्षों तक यहां 800 ग्राम कोयला प्रति यूनिट खर्ज कर बिजली की दरें बढा कर आम बिजली उपभोक्ता से अरबों रुपये वसूले गए , कोयला उन्ही खदानों से आ रहा है वही गुणवत्ता है 25 साल पुरानी वही यूनिटें है तब यह कैसे , जबकि यूनिटों में कोई वृहद रेनोवेशन भी नही हुआ  तो पहले कोयले की मनमर्जी खपत दिखाकर जनता की गाढ़ी कमाई की लूट की गई और जो स्टाक यार्ड में वर्तमान  में पहाड़ों के ढेर जैसा करोड़ों रुपयों के कोयले का जो स्टाक है वह जनतासे बिजली भुगतान वसूला गया है. अन्यथा यह कोयला यहां आया कहाँ से?

MD नंदा का यह पहला SGTPS निरीक्षण 3 दिवसीय दौरा  है देखना है कि परियोजना में अनवरत रूप से चल रहे कोयले के काले खेल पर क्या कार्यवाही होती है या कोल मैनेजमेंट  में बैठे कुछ अधिकारी दिग्भ्रमित करने में कितना सफल हो पाते हैं या उनके षड्यंत्र से  पर्दा उठता पाता है या वे बेख़ौफ़ हो भविष्य ऐसा कर प्रदेश में कोयले को खेल और कृत्रिम संकट के नाम पर अपना डंका बजाते रहते है यह समय  बताएगा.

नीरज यादव न्यूज़ विज़न उमरिया

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