सुपारी देकर कराई गई थी राजीव गांधी की हत्या: स्वामी का बड़ा खुलासा, CBI ने कहा: दोबारा नहीं खुलेगा केस - News Vision India

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13 Mar 2018

सुपारी देकर कराई गई थी राजीव गांधी की हत्या: स्वामी का बड़ा खुलासा, CBI ने कहा: दोबारा नहीं खुलेगा केस

Subramanian Swamy On Rajiv Gandhi Death


हमेशा विवादों में रहने वाले भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेता और सांसद सुब्रमनियम स्वामी ने पूर्व प्रधानमंत्री राजिव गांधी कि हत्या को लेकर एक बड़ा खुलासा किया है। सुब्रमण्यम स्वामी ने कहा कि पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी की सुपारी देकर हत्या कराई गई थी

सुब्रमण्यम स्वामी ने कहा कि जिस तरह से राहुल गांधी कहा कि हमने अपने पिता के हत्यारों को माफ कर दिया है, उससे उन्हें लगता है कि पैसों के लिए पैसों के लिए राजीव गांधी की हत्या करवाई गई थी। सुब्रमण्यम स्वामी ने पूर्व प्रधानमंत्री की हत्या की दोबारा जांच की मांग की है।

स्वामी ने कहा कि हत्या के लिए लिबरेशन टाइगर्स ऑफ तमिल ईलम (एलटीटीई) के हाथ के पीछे ये कारण बताया कि भारतीय सेना को उससे लड़ने के लिए श्रीलंका भेजा गया था, लेकिन लेकिन राजीव गांधी सिर्फ संसद में पारित प्रस्ताव पर काम कर रहे थे, क्योंकि श्रीलंका ने एलटीटीई से लड़ने के लिए मदद की मांग की थी।

CBI ने कहा- दोबारा नहीं खुलेगा केस

वहीं  केंद्रीय जांच ब्यूरो( सीबीआई) ने उच्चतम न्यायालय से एजी पेरारिवलन के उस आवेदन को खारिज करने का अनुरोध किया है जिसमें उसने राजीव गांधी हत्याकांड में मई1999 में खुद को दोषी ठहराए जाने के फैसले को वापस लिए जाने का आग्रह किया है। सीबीआई ने कहा कि पेरारिवलन का आवेदन खारिज कर दिया जाना चाहिए क्योंकि यह विचारयोग्य नहीं है।

एमडीएमए ने कही ये बड़ी बात

शीर्ष अदालत में दायर एक हलफनामे में सीबीआई की बहु अनुशासनात्मक निगरानी एजेंसी( एमडीएमए) ने कहा है कि उच्चतम न्यायालय साजिश में दोषी एजी पेरारिवलन की भूमिका की परिणति पूर्व प्रधानमंत्री और अन्य की हत्या के रूप में निकलने के तथ्य को पहले ही मान चुका है। एमडीएमए राजीव गांधी की हत्या के पीछे किसी बड़े षड्यंत्र के पहलू की जांच कर रही है।

अदालत के फैसले पर पुनर्विचार का अनुरोध

एजेंसी ने कहा कि शीर्ष अदालत के11 मई1999 के फैसले को वापसलेने के अनुरोध ने वाला आवेदन विचारयोग्य नहीं है क्योंकि इसमें समूचे मामले को गुण- दोष के आधार पर फिर से खोलने का आग्रह किया गया है जिसकी अनुमति नहीं दी जा सकती। एमडीएमए ने यह भी कहा कि पेरारिवलन की वह याचिका पहले ही खारिज की जा चुकी है जिसमें उसने मामले में खुद को दोषी ठहराने के शीर्ष अदालत के फैसले पर पुनर्विचार का अनुरोध किया था।

सीबीआई से पेरारिवलन

एजेंसी ने अपने हलफनामे में कहा कि11 मई 1999 के फैसले को वापस लेने की मांग करने वाली याचिका को खारिज कर दिया जाना चाहिए और आवेदक( पेरारिवलन) पर भारी जुर्माना लगाया जाना चाहिए। हलफनामा शीर्ष अदालत के24 जनवरी के निर्देश के अनुपालन में दायर किया गया जिसमें सीबीआई से पेरारिवलन की संबंधित याचिका पर जवाब देने को कहा गया था।

राजीव गांधी की हत्यारन

अदालत ने पेरारिवलन द्वारा उठाए गए सवालों को‘‘ गंभीरएवं‘‘ चर्चा किए जाने योग्यकरार दिया था। पेरारिवलन ने यह कहते हुए शीर्ष अदालत के आदेश को वापस लिए जाने का आग्रह किया है कि वह साजिश के बारे में नहीं जानता था। तमिलनाडु के श्री पेरंबदूर में 21 मई1991 की रात एक चुनाव रैली में धनु नाम की मानव बम महिला ने पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी की हत्या कर दी थी।

मौत की सजा बरकरार

इस हमले में14 अन्य लोग भी मारे गए थे जिनमें धनु खुद भी शामिल थी। पूर्व प्रधानमंत्री की हत्या मानव बम हमले की शायद ऐसी पहली घटना थी जिसमें एक बड़े नेता की जान चली गई। उच्चतम न्यायालय ने इस मामले में मई1999 के अपने आदेश में चार दोषियों- पेरारिवालन, मुरुगन, शांतम और नलिनी की मौत की सजा बरकरार रखी थी।

फैसला करने में केंद्र ने 11 साल की देरी

अप्रैल 2000 में तमिलनाडु के राज्यपाल ने राज्य सरकार की सिफारिश तथा पूर्व कांग्रेस अध्यक्ष एवं राजीव गांधी की पत्नी सोनिया गांधी की अपील पर नलिनी की मौत की सजा को बदल दिया था। शीर्ष अदालत ने18 फरवरी 2014 को पेरारिवलन तथा दो अन्य- शांतन और मुरुगन की मौत की सजा को घटाकर इस आधार पर उम्रकैद में तब्दील कर दिया था कि उनकी दया याचिकाओं पर फैसला करने में केंद्र ने 11 साल की देरी की।

पेरारिवालन का इकबालिया बयान दर्ज

पेरारिवलन (45) ने अपने आवेदन में कहा है कि उसे नौ वोल्ट की दो बैटरियों के आधार पर दोषी ठहराया गया जिनका राजीव गांधी की जान लेने वाले आईईडी में कथित इस्तेमाल हुआ था। सीबीआई के तत्कालीन पुलिस अधीक्षक वी त्यागराजन ने आतंकी एवं विध्वंसक गतिविधि (रोकथाम) कानून के तहत पेरारिवालन का इकबालिया बयान दर्ज किया था।

पेरारिवलन के आवेदन में दावा किया गया कि सीबीआई के पूर्व अधिकारी ने अपने हलफनामे में उल्लेख किया था कि पेरारिवालन ने अपने इकाबलिया बयान में कहा था कि बैटरियों की खरीद के समय उसे बिल्कुल भी जानकारी नहीं थी कि बैटरियों का इस्तेमाल किस काम में किया जाना है।

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