डिफाल्टर उपायुक्त नारायण मिश्र पर जांच रोकी उप सचिव अरुण तोमर ने, वल्ल्ब भवन भोपाल - News Vision India

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18 Mar 2018

डिफाल्टर उपायुक्त नारायण मिश्र पर जांच रोकी उप सचिव अरुण तोमर ने, वल्ल्ब भवन भोपाल

MP Commercial Tax Narayan Mishra
आम आदमी को न्याय इनसे नही मिलेगा, वो छीनना पड़ेगा इनसे , या फिर बिना पैसा यहाँ कोई काम समय पर नही, विधिवत नही, पैसा दो और रात को 12 बजे तक आदेश पारित करवालो अपने मन मुताबिक, इनका कोई आडिट नही होता नियम सेचहु और फान्देबाजी है, चुनाव के समय गुल खिलायेगा कमल, मंत्री जी से मांगा जायेगा जवाब

प्रमुख सचिव और मुख्या सचिव से क्रमश शिकायत आवेदन हस्तान्त्र्ण होकर उप सचिव वाणिज्यिक कर अरून तोमर के पास के कार्यवाही को लंबित है, शिकायत पर कार्यवाही नही हो रही है, और ये वही उप सचिव है जिन्होंने राज्य आर्थिक अपराध अन्वेषण ब्यूरो द्वारा पुराने डिफाल्टर अपील उपायुक्त ओम प्रकाश  वर्मा को बहाली आदेश 1 दिन के लिए जारी किया था, जिसकी प्रति सूचना अधिकार में इनके द्वारा नही दी जा रही है, यह आदेश राज्यपाल के नाम से जारी किये गए है, और वो भी उस समय जब महा महिम नई राज्यपाल आनंदी बेन पटेल का आगमन शेष था, गजब का संरक्षण दिया जाता है डिफाल्टरो को, सभी प्रकार से सुरक्षित है ये एक जैसे सब एक साथ  ग्रुप मेंआम आदमी करते है शिकार, आम आदमी को सभी प्रकार से पेनाल्टी है और इन्हें हर प्रकार से छूट प्राप्त है, 


नारायण मिश्रा भ्रष्ट उपायुक्त के विरुद्ध पीएमओ से विशेष निर्देश जारी करते हुए मध्य प्रदेश के मुख्य सचिव को जांच कार्यवाही हेतु तत्काल प्रभाव से जल्द से जल्द निरीक्षण रिपोर्ट पीएमओ को तलब करने के निर्देश जारी किए गए,

करीब 50 करोड से अधिक की क्षति कारीत कर चूका है उपयुक्त नारायण मिश्र, महालेखाकार  आडिट विंग को भी फर्जी डिस्पोजल रिपोर्ट प्रस्तुत की है, जिनकी जानकारी सूचना अधिकार में नही दी जा रही है, 

100 साल मुगलों ने राज किया 200 साल अंग्रेजों ने राज किया,  अब यह भ्रष्टाचारी जनता पर राज कर रहे हैं, आगामी जाँच में इस भ्रष्ट उपायुक के समर्थ अधिकारियो के कारनामो पर बड़ा खुलासा होगा, जिनमे कुछ महिला अधिकारी भी शामिल है,  

और आश्चर्य की बात तो यह है कि अभी तक वाणिज्य कर विभाग का आयुक्त सो रहा है और प्रमुख सचिव को किसी प्रकार की जानकारी नहीं हो पा रही है,  साथ ही भ्रम में रखकर फिलहाल नारायण मिश्रा के विरुद्ध कार्यवाही  रोके जाने का भरपूर प्रयास किया जा रहा है,

दिनांक 7 मार्च 2018 को प्रधानमंत्री कार्यालय नई दिल्ली से मध्य प्रदेश के अनुभाग अधिकारी श्री समीर कुमार ने आवेदक की शिकायत पर तत्काल प्रभाव से कार्यवाही कर रिकॉर्ड अपडेट करने के लिए मुख्य सचिव को नियुक्त किया गया है,  इतनी त्वरित कार्यवाही के उपरांत भी इस विषय पर भोपाल कार्यालय महालेखाकार आर्थिक एवं राजस्व क्षेत्र लेखा परीक्षा शांत बैठे हैं

सभी प्रकार से डिफाल्टर उपायुक्त नारायण मिश्रा के द्वारा की गई अनियमितताओं के संबंध में दी गई संपूर्ण जानकारी के उपरांत भी महालेखाकार कार्यालय से किसी प्रकार की कोई कार्यवाही नहीं की जा रही है पिछले 5 वर्षों से फर्जी डिस्पोजल रिपोर्ट नारायण मिश्रा के द्वारा प्रस्तुत की जा रही है

 राज्य शासन के द्वारा अधिसूचना जारी करते हुए वर्ष 2011-12 में निर्देश जारी किए गए थे, कि सारे प्रकरण ऑनलाइन रह जायेंगे बावजूद उसके उपायुक्त डिफाल्टर उपायुक्त नारायण मिश्रा के द्वारा जारी अधिसूचना में निर्देशित किए गए मापदंडों को दरकिनार करते हुए तथा उन सभी सूचनाओं को जिनमे की प्रकरणों के निराकरण की अंतिम तिथि नियत की गई थी,  उसके विरुद्ध भी कार्य किया जा रहा है और आज वर्तमान में सारी डिस्पोजल रिपोर्ट पिछले 5 वर्षों की तैयार हो जाने के बाद भी अभी तक 4 वर्ष से अधिक के पुराने प्रकरण मैनुअल तरीके से निपटाया जा रहे हैं , ऐसे में महालेखाकार की रिपोर्ट अपने आप में झूटी हो जाती है,  

मजे की बात तो यह है महालेखाकार कार्यालय के अधिकारी  इसकी पूरी जानकारी के उपरांत शांत रहे हैं और उनके द्वारा कोई कार्यवाही नहीं की जा रही है पूरी संलिप्तता देखी जा सकती है कि किस प्रकार से ऑडिटर आते हैं और इस भ्रष्ट उपायुक्त स्तर पर प्राप्त की गई डिस्पोजल रिपोर्ट को सही बोलते हुए रिकॉर्ड अपडेट कर देते हैं औपचारिकता के आधार पर 2-4 केस  खोलने के आदेश दे देते हैं,  

मध्य प्रदेश वैट  अधिनियम की धारा 21-1 के तहत औपचारिक कार्यवाहियां करवाते हुए फाइलों को बंद कर दिया जाता है आम जनता मजबूर है इस तरह के भ्रष्टाचार से जूझने के लिए और कोई तरीका रह नहीं जाता है क्योंकि यह अधिनियम अंतर्गत सुरक्षित रहे हैं और जनता मजबूर है ,और जनता/आवेदक/व्यवसायी का काम होना या करना उसके पीछे महज व्यक्तिगत लाभ है, केवल 2 घंटे की पूछताछ में सब उगलवाया जा सकता है नारायण मिश्र से, परन्तु यह मध्य प्रदेश है, cm-हेल्पलाइन भी मजाक बन गए है यहाँ , दूसरा पाकिस्तान साबित हो रहा है, आहिस्ता आहिस्ता   












पूर्व में निलंबित वाणिज्यिक कर उपायुक्त ओम प्रकाश वर्मा के सम्बन्ध में प्रकाशित खबरे जिसने विभाग पर भ्रष्टाचार का प्रकाश डाला और निलंबित हुआ


1.   पैसा दो न्याय लोवाणिज्यिक कर विभाग  जबलपुर में बिना लेनदेन के कोई काम नहीं
2.   वाणिज्यिक कर विभाग के पी. वर्मा उर्फ़ ओमप्रकाश का एक और केस सामने आया                        http://www.newsvisionindia.tv/2017/11/op-verma-corruption-mpctd-jbp.html
3.   वाणिज्यिक कर उपायुक्त पीवर्माउर्फ़ ओमप्रकाशअंततः निलंबित
4.  न्याय विक्रेता निलंबित उपायुक्त पर कार्यवाही लंबित वाणिज्यिक कर विभाग मध्य प्रदेश
5. रोग मुक्त हुआ विभागभ्रष्टाचारी सेवा से निवृत्त हुआनिलंबन काल में

वर्तमान में एक नया भ्रष्टाचारी वाणिज्यिक कर विभाग में उभर कर सामने आया हैजिसकानाम है नारायण मिश्र, जिसने करोडो के 49 फॉर्म बेच डाले
नाम के नारायण , काम के भस्मासुर

1.       50 करोड़ का घोटालावाणिज्य कर विभाग का फार्म-49 घोटालाजबलपुर मध्य प्रदेश
2.      
         घोटालेबाज उपायुक्त "नारायण मिश्रपर कार्यवाही शुरूवाणिज्यिक कर विभागमध्य प्रदेश

भ्रष्टाचार का सीधा मतलब है वाणिज्यिक कर विभाग, मजाक बन गया वाणिज्य कर विभाग का उपायुक्त कार्यालय,

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