वाणिज्यिक कर के आयुक्त पर प्रमुख सचिव को भी जांच अधिकारी दे रहे लोलीपोप, मामला नारायण मिश्र, डिफाल्टर उपायुक्त - News Vision India

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4 Apr 2018

वाणिज्यिक कर के आयुक्त पर प्रमुख सचिव को भी जांच अधिकारी दे रहे लोलीपोप, मामला नारायण मिश्र, डिफाल्टर उपायुक्त

dc defaulter narayan mishra

              
प्रमुख सचिव मेरा कुछ नही उखाड सकता :- नारायण मिश्रा उपायुक्त वाणिज्यिक कर जबलपुर

ये शब्द और दम भरने का दुसाहस किया है एक क्रूर भ्रष्ट उपायुक्त वाणिज्यिक कर जबलपुर के, जिसने जबलपुर में लगभग समय के चिरकाल कर अपना नाम भ्रष्टाचार की अविस्मरणीय किताब में सबसे ऊपर दर्ज किया है, ये महान भ्रष्ट हस्ती उत्तर प्रदेश के एक छोटे से कसबे का रहने वाला है, जो अभी वर्तमान में अपने सभी काले कारनामो को छुपाने के लिए अधीनस्तो को और रिटायर्ड कर्मियों को भी काम पर लगाये हुए है, वो भी पूरी रात भर अनाधीकृत रूप से अपने वाणिज्यिक कर कार्यालय में,  कई प्रकर है जो निर्वर्तन निर्धारित करने की अंतिम तिथि से उतीर्ण हो चुके है, परन्तु इस भ्रष्टाचार के विरुद्ध दायर शिकायत में चल रही कार्यवाही पर मारे दहशत के लीपा पोती करने में बैक डेट में सारे आदेश पारित कर mptax के वेब पोर्टल पे दर्ज करने की कवायद में व्यस्त है, परन्तु तकनीकी जानकरी के आभाव में यह भ्रष्टाचारी ये भूल जाता है की देर सिस्टम / कंप्यूटर / इंट्रानेट पर देरी से किये गए अविधिक कार्य को कोई बैक डेट में अपडेट नही कर सकता, इस भ्रष्टाचार पर कार्याही का प्रभार अब प्रमुख्स अचीव पर है, जिनकी कुछ नही कर पाने की हैसीयत की व्याख्यान स्वयं भ्रष्टाचारी द्वारा की जा चुकी है,

इस भ्रष्टाचार की प्रमुख सचिव मनोज श्रीवास्तव संभवत:  जानकारी पूरी रखते है, और कही न कही संलिप्तता के चलते इस भ्रष्टाचारी नारायण मिश्र को पनाह मिली हुयी है, अन्यथा एक  I A S केटेगरी का वरिष्ठ अनुभवी अधिकारी नारायण मिश्र जैसे भ्रष्ट उपायुक्त पर कार्यवाही करने में देर क्यों करता , नारायण मिश्र का यह भी कहना है की पहले भी एक मामले में भी एक अधिकारी जो वर्तमान में और भी वरिष्ठ पद पर पहुँच चुके है उनकी मदद से फर्जी चालान काण्ड में से दोषमुक्त हुआ है, इस प्रकार दम भरने वाले भ्रष्टाचारी पर मेहरबान वित्त मंत्रालय जल्दी ही अपने मंत्री की कुर्सी दाव पर लगवाएगा, और साथ ही एक दिन पूरे वित्त मंत्रालय में जमा की गयी आय व्यय की हिस्ट्री खंगालने पर मजबूर करेगा,  चहुँ और भ्रष्टाचार की दुर्गन्ध से माहौल दूषित कर्ता उपायुक्त कार्यालय सक्त कार्यवाही के साथ निष्कासन की कार्यवाही को भी निहार रहा है, परन्तु वो कमरा जहा ये भ्रष्टाचारी भ्रष्टाचार की दुर्गन्ध फैला रहा है, वो भी इनसे निजात पाने तरस रहा है, बात सही भी है किसी खाली स्थान पर कोई सुगन्धित फूल का असर खुशनुमा माहौल बना देता है और किसी स्थान पर जहरीले आस्तीन के सांप का होना अपने आप में एक डर पैदा कर देता है, ऐसा ही हाल है उस कार्यालय का, स्वाभाविक है उस ज़हरीले सांप से और उसके दुष्प्रभावो  से प्रमुख सचिव वाकिफ हों,


फॉर्म 49 घोटाले की जाँच की  शिकायत किये 25 दिन बीत चुके सम्बंधित महिला अधिकारी ने अभी तक जाँच शुरू भी नही की न ही आवेदक को बताना जरुरी समझा, आने वाले समय में कानून प्रक्रिया का निष्पादन होने उपरान्त वृत्त 2 वाणिज्यिक कर विभाग जबलपुर में हो चुके भ्रष्टाचार पर बड़ा पर्दाफाश होगा,


बहरहांल यह बात सामने उपज के आयी है की भ्रष्टाचार इस  प्रदेश में खुल कर सीना तान कर किया जा सकता है, अपीलीय कार्यालय सञ्चालन में पेट भर के एक रिश्वतखोर अधिकारी पैसा खाता था जिसका नाम था ओमप्रकाश वर्मा ये वो सीनियर भ्रष्टाचारी है जिसका नाम जबलपुर के वाणिज्यिक कर के इतिहास में ड्यूटी पूरी करने के पहले निलंबन के साथ दर्ज हो गया, बस पीछे पीछे पईंया पईयां  एक और उपायुक्त बहार निकल कर इतिहास में नाम दर्ज करने हाजिर हुआ है नारायण मिश्र, जिसकी करोडो की संपत्ति है, जिसमे उसके बेटे के नाम से भी काफी संपत्ति है, आयकर विभाग से उसके सम्बन्ध में जानकारी सूचना अधिकार में अपेक्षित है, साथ ही क्रॉस वेरिफिकेशन में सारी एंट्री का मिलान कराया जायेगा, जिस पर लाखो की टैक्स चोरी की संभावनाओ को नकारा जाना उचित नही है , शेष वाणिज्यिक कर विभाग को तो इस भ्रष्टाचारी ने अपने पद के दुरूपयोग में विभाग को और प्रमुख सचिव जैसे अशिकरियो को धूल चटा  रखी है, जो इसका कुछ नही कर सकते,


पुरानी शिकायतों पर अपने कार्यालय में लीपापोती पूरी सक्रियता के साथ शुरू कर चूका है ये भ्रष्टाचारी,  सारे  रिकॉर्ड रात भर बैठ के दुरुस्त  करवा रहा है, वो भी रिटायर्ड करमचारियों से, ये एक सामान्य प्रक्रिया है हराम की कमाई करने का सफ़ेद तरीका है, उपायुक्त लेवल पर सारे प्रकरण जैसे तैसे एक पक्षीय पारित कर दिए जा रहे है, वो भी लेट, और नेट पे अपलोड मारा जा रहा है, साथ ही, उन्हें भविष्य में वैट अधीनीयम की धारा 34 के तहत फिर से खोला जायेगा, न्यूज़ विजन की खबर का ये असर तो हुआ है की काम गलत हो या सही समय पे नेट पर अपलोड हो रहा है, फिर से खुलेंगे सारे एक पक्षीय निर्वर्तन आदेश एक साल का मिलेगा भ्रष्टाचारी को समय निराकरण के लिए, जिसमे आय के फर्जी स्त्रोत बनेंगे, पर ये कों बताये एस अज्ञानी को की सिस्टम पे होने वाला सारा काम अपना एक रिकॉर्ड स्वयं संधारित कर लेता है, जिसको बैक डेट में नही किया अजा सकता है, वर्ष 2015-16 के निर्वर्तन आदेश तो पारित किये जा सकते है थोड़ी सी लेट समय सीमा में, पर पिछले 5 सालो का रिकॉर्ड कैसे मिटाया जायेगा कैसे सुधार जायेगा, और अकाउंटेंट जनरल को दी जा चुकी रिपोर्ट्स पर खुलासे होना शेष है, इस भ्रष्टाचारी के कारनामो को पूरी तरह से जनता के सामने इसकी शकल के साथ नग्न करने मुहीम जारी है, कार्यवाही इस पर नही करेगा प्रमुख सचिव क्योकि यह सत्य है की अभी तक प्रमुख सचिव ने ऐसे भ्रष्टाचारी के विरुद्ध कुछ नही किया है, सीधा अर्थ है कही न कही इस भ्रष्टाचारी की चापलूसी में दम है, या फिर मिल बाँट कर खाने की स्तिथि को उत्पन्न करता है ये माहौल

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