भ्रष्टाचार के जहरीले काले सांप को किसका संरक्षण है, वाणिज्यिक कर के पोर्टल पर भी होता है फर्जी काम, - News Vision India

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11 Apr 2018

भ्रष्टाचार के जहरीले काले सांप को किसका संरक्षण है, वाणिज्यिक कर के पोर्टल पर भी होता है फर्जी काम,

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भ्रष्टाचार के जहरीले काले सांप को किसका संरक्षण है, वाणिज्यिक कर के पोर्टल पर भी होता है फर्जी काम,

हजारो व्यापारियों ने असेसमेंट करा लिए मैन्युअल जो अपने आप में फर्जी है पर लोगो को पता ही नही है, हजारो के आदेश मैन्युअल पारित किये है, जिसमे कई लोगो ने दलाली कर लाभ कमाया है, यह सभी आदेश अपने आप में फर्जी है, लोगो को कानून बता बता कर करते है मनमाने आदेश पारित, खुद में छुपे भ्रष्टाचारी को कानून का चोला ओड़ कर बताते है अधीनीयम  के रखवाले

उपायुक्त वाणिज्यिक कर नारायण मिश्र ने  डिजिटल इंडिया का नया घिनौना चेहरा जनता को दिखाने का काम किया है, न जाने और कितनी छवि ख़राब करेगा ये भ्रष्ट उपायुक्त,

आपको बतादे की वाणिज्यिक कर विभाग में सरे व्यापारियों की ऑनलाइन रिकॉर्ड बनाने का काम 2003 में शुरू किया गया था जो 2007 तक लगभग पूरा हो चूका था,  उसके बाद वर्ष 2011 से सभी आदेश पारित करने के काम उस समय के आयुक्त IAS  SHAILENDER SINGH  द्वारा जारी अधिसूचना के अनुसार ऑनलाइन किये जाने थे, परन्तु आज भी उस उपायुक्त के कार्यालय अंतर्गत आदेश बिना ऑनलाइन प्रक्रिया के पारित किये जाते है,   हजारो व्यापारियों ने असेसमेंट करा लिए मैन्युअल जो अपने आप में फर्जी है पर लोगो को पता ही नही है, हजारो के आदेश मैन्युअल पारित किये है, जिसमे कई लोगो ने दलाली कर लाभ कमाया है, यह सभी आदेश अपने आप में फर्जी है

भ्रष्टाचारी उपायुक्त नारायण मिश्र ने तो इस विषय में लगभग अपना नाम स्वर्णिम अक्षरों में दर्ज कराया है, महान  हस्तियों की मूर्तियाँ हर चौक पर अधिष्ठापित की जाती है, उसी प्रकार विपरीत छवि के लोगो में भ्रष्टाचार की चरम सीमा तक पहुंचे नारायण मिश्र की मूर्ती वाणिज्यिक कर विभाग जबलपुर के गेट पर लगाने का समय लगभग आ चुका है,

पूर्व आयुक्त के द्वरा पारित अधीसूचनाओ को दरकिनार करते हुए काम करने वाले इस भ्रष्टाचारी के विरुद्ध वर्तमान आयुक्त राघवेन्द्र सिंह मौन है, उनके द्वारा संरक्षण दिया जा कर सभी और से स्वयं अपने कार्यालय में सांप पाले जा रहे है, लोकहित में कर वसूलने का काम करने हेतु नियुक्त इस भ्रष्टाचारी ने विरासत के प्राप्त की गयी दूकान समझ कर एस विभाग को चलाया जाता है, पिछले 5 साल से इस ट्रान्सफर भी आयुक्त के द्वारा नही किया गया है, इस तरह की संभावनो को कैसे नाकारा जाये की सबकी मिलीभगत से जनता का शोषण किया जाता है,  

ऐसे भ्रष्टाचारी अधीनीयम के तले सुरक्षित है यह जनता की मज़बूरी है ऐसे अधिकारी को जी साहब बोलना, अंदर से कौन क्या बोलता है इसका अंदाजा लगाया जा सकता है, आने वाले समय में लोगों से राय लेकर कार्टून भी पेश किए जाएंगे

अभी हाल ही में प्राप्त जानकारी के अनुसार इस भ्रष्टाचारी के द्वारा अपने कार्यालय स्तर संभाग क्रमांक 1 के अंतर्गत आवंटित प्रकरणों को जोकि 2015 -16 से संबंधित हैं बहुत से प्रकरण एकपक्षीय निर्धारित कर दिए हैं यह जादू हमारी सक्रियता के चलते हुआ है और यह सभी प्रकरण जो इनके द्वारा पारित किए गए हैं यह भी सभी अधिसूचना में निर्धारित तिथि के उत्तीर्ण होने के बाद निर्धारित किए गए हैं और इस में व्यापारियों को सुनवाई का मौका दिया भी गया है कि नहीं यह भी एक रहस्य है क्योंकि ऑनलाइन आदेश पारित करने के लिए अधिकारी की ओर से व्यापारियों को मौका देना अनिवार्य है जिसमें ऑनलाइन नोटिस जारी किए जाते हैं जिसके लिए मध्य प्रदेश कमर्शियल टैक्स के पोर्टल पर Task जनरेट करना होता है वह इस भ्रष्टाचारी के द्वारा किया गया है कि नहीं पता नहीं फिर यह बात सामने आती है कि इसके द्वारा पारित किए गए आदेश सभी प्रकार से फर्जी साबित हो जाते हैं अभी तक की जानकारी यह है कि आने वाले समय में वैट अधिनियम की धारा 34 के तहत सभी प्रकरणों को फिर से खोला जाएगा जिसमें उनके निराकरण की 1 साल की अवधि मिल जाएगी और बैठ करके आराम से रुपया कमाया जाएगा अभी तक की गतिविधिि से यह संभावनाएं प्राथमिक तौर पर उत्पन्न हो रही है

फिहाल इस भ्रष्टाचारी की ईमानदारी के प्रमाण सूचना अधिकार में अपेक्षित है जिनको आये दिन ख़ारिज करने का सिला जारी है, अपील में अनावश्यक समय ख़राब होता है, इसकी पूरी जानकारी है इसे, जनता के विरुद्ध आदेश पारित करने के सीधे अधिकारी इसके पास है, इसके विरुद्ध आदेश पारित करने के अधिकार जनता के पास है, बस भारत देश की यही मज़बूरी है, अंग्रेज चले गए और इस तरह के लूटेरे छोड़ गए,

आयुक्त कार्यालय में हो रहे भ्रष्टाचार पर भी जाँच जारी है, जल्दी ही  संघ लोक सेवा आयोग को इस तरह के भ्रष्टाचार के सम्बन्ध में प्रमाण सहित अवगत कराया जायेगा, ताकी भविष्य में उनसे देश हित में उचित निर्णय लिए जा सके 


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