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9 May 2018

एक पत्नी एक ही विवाद पर FIR दो, सुप्रीमकोर्ट से मिला न्याय

Two FIR Not Maintainable For One Offence
एडवोकेट एहतेशाम हाशमी ने बताया कि उनके पक्षकार की 9.3.2008 में शादी हुई थी. कुछ समय बाद उनकी बीवी उनको छोड़कर अलग रहने लगी थी, जो पेशे से डॉक्टर हैं. उनकी शादी बगैर किसी मांग या दहेज के हिंदू रीति रिवाज से हुई थी. मगर उनकी पत्नी ने उन पर और उनके परिवार के खिलाफ 29.4.2013 को मारपीट, दहेज मांगना, प्रताड़ित करना, जान से मारने की धमकी देना व अन्य धाराओं पर थाना तालकातोरा, जिला लखनऊ उत्तर प्रदेश में दर्ज कराई.

इतना ही नहीं उनकी पत्नी ने शातिरगिरी दिखाते हुए 1.7.2013 को थाना कोतवाली जिला फतेहपुर उत्तर प्रदेश में फिर से दहेज व मारपीट व अन्य धाराओं पर FIR दर्ज कराई.

यह दोनों FIR लगभग एक सी हैं, एक ही आरोप है और उसी क्रमांक में आरोपी हैं.

पुलिस में दोनों FIR पर चालान न्यायालय में प्रस्तुत कर दिया. जिस पर की उनका पक्षकार इलाहाबाद हाईकोर्ट में दस्तक दी और मांग की एक ही इल्जाम है एक ही घटना है और इस पर दो FIR हुई है. कृपया कर इनमें से एक को ख़तम कर दें या दोनों की इकट्ठा ट्रायल करा दें.

जिस पर की उच्च न्यायालय इलाहाबाद में उनकी याचिका खारिज कर दी. न्यायालय के आदेश से संतुष्ट ना होकर पीड़ित ने सर्वोच्च न्यायालय में याचिका लगाई, जिस की पैरवी एडवोकेट एहतेशाम हाशमी ने की और दिनांक 8.5.2018 को इलाहाबाद हाईकोर्ट के आदेश को सही ना मानते हुए पीड़ित की याचिका की सुनवाई करते हुए पीड़ित को न्याय दिया.

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