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27 Jun 2018

राज्यपाल कल्याण सिंह का थप्पड मारने वाला कथन कितना उचित?

Why We Need Reservations In India Details

लखनऊ से स्टेट हेड न्यूज विजन उत्तर प्रदेश भानू मिश्रा की आरछण पर विशेष प्रस्तुति पढें

आखिर कौन छीन रहा है आरक्षण?


राजस्थान के राज्यपाल कल्याण सिंह ने 25 जून को लखनऊ में पिछड़ा वर्ग के एक सम्मेलन में भाग लिया। यह सम्मेलन पूर्व सीएम बीपी सिंह की जयंती पर उनके समर्थकों ने आयोजित किया था। सब जानते हैं कि कल्याण सिंह पिछडे वर्ग से ही हैं और इस समय राजस्थान के राज्यपाल के संवैधानिक पद पर हैं। वे पूर्व में उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री भी रह चुके हैं। इस समय राजस्थान, उत्तर प्रदेश और केन्द्र में उसी भाजपा की सरकार है जिसने कल्याण सिंह को राज्यपाल बना रखा है। लखनऊ के सम्मेलन में कल्याण सिंह ने कहा कि आरक्षण आपका हक है। कोई छीनने का प्रयास करें तो थप्पड़ मार अधिकार छीन लो। किसी भी कीमत पर अधिकार मत खोना। यह अधिकार लम्बे संघर्ष के बाद मिला है। 

कल्याण सिंह ने यह भी कहा कि वे संवैधानिक पद पर हैं इसलिए राजनीति की बात नहीं कर रहे हैं। सवाल उठता है कि आखिर आरक्षण कौन छीन रहा है। प्रधानमंत्री से लेकर मुख्यमंत्री तक कह चुके हैं कि वर्तमान आरक्षण व्यवस्था में कोई बदलाव नहीं होगा। यानि यूपी जैसे राज्य का सीएम रहने और वर्तमान में राजस्थान का राज्यपाल होने के बाद भी कल्याण सिंह के परिवार के सदस्यों को आरक्षण का लाभ मिलता रहेगा। भले ही सामान्य वर्ग के अति गरीब परिवार को कितना भी नुकसान हो जाए। मैं यहां सामान्य वर्ग की तरफदारी नहीं कर रहा, लेकिन जब आरक्षण हटाने अथवा कम करने की कोई बात ही नहीं है तो फिर थप्पड़ क्यों मारे जा रहे हैं? सामान्य वर्ग के जो नेता सत्ता में बैठे हैं उनमें इतनी हिम्मत ही नहीं कि वे अपने वर्ग के पीड़ित युवाओं का दर्द भी समझ सके। यदि कोई नेता कहेगा तो तत्काल उसका विधायक मंत्री आदि का पद छीन लिया जाएगा। वैसे भी देश की वर्तमान व्यवस्था में अब आरक्षण कोई मुद्दा है ही नहीं। 

जो व्यवस्था है वह चलती रहेगी। अच्छा हो कि कल्याण सिंह जैसे राजनेता सामान्य वर्ग के लोगों की समस्याओं पर भी विचार करें। सामान्य वर्ग में ऐेसे अनेक परिवार हैं जिनके पास दो वक्त की रोटी का भी समुचित इंतजाम नहीं है, लेकिन सिर्फ जाति की वजह से ऐसे परिवारों के युवाओं को उच्च शिक्षा में प्रवेश अथवा नौकरी के लिए टैस्ट में 90 प्रतिशत से भी ज्यादा अंक लाने होते हैं। कल्याण सिंह के परिवार के सदस्यों को कितने प्रतिशत अंक लाने होते हैं,यह उन्हें अच्छी तरह पता है।

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