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21 Jul 2018

रोज इस खौफनाक पुल से 'जिंदगी की नींव' बनाने पहुंचते हैं स्कूली बच्चे

Damaged Bridge Only Way To Reach School

रोज इस खौफनाक पुल से 'जिंदगी की नींव' बनाने पहुंचते हैं स्कूली बच्चे

सुलतानपुर । जिले में स्कूली बच्चों को स्कूल पहुंचने के लिए रोजाना खतरनाक रास्ते से होकर गुजरना पड़ता है। दरअसल, बच्चों के जाने के लिए लकड़ी का पुल बनाया गया है लेकिन यह खतरों से खाली नहीं है। हालांकि, मजबूरी के चलते लोगों के सामने इसी से गुजरने की चुनौती है। लकड़ी के पुल की वजह से आए दिन हादसे होते रहते हैं लेकिन इसके बावजूद करीब तीन दशक से तीस हजार की आबादी के लिए यह जुगाड़ू पुल ही आवागमन का एकमात्र साधन है।

जिले के भदैंया विकास क्षेत्र अंतर्गत पाल्हनपुर और नहरपुर गांव के बीच से सिंचाई खंड अंतर्गत रामगंज रजबहा गुजरता है। ज्यादातर विद्यालय नहर के पूर्वी छोर पर हैं। यहां तक की हनुमानगंज और कंधईपुर को जोड़नेवाला मुख्यसंपर्क मार्ग भी पूर्वी छोर से होकर निकला है। इसके लिए पश्चिमी छोर पर बसे लोगों को रोजमर्रा के कामकाज निपटाने के लिए नहर पार करना मजबूरी है।

शासन, प्रशासन ने नहीं सुनी तो चुन लिया खौफनाक रास्ता

प्राथमिक विद्यालय नरहरपुर, प्राथमिक विद्यालय पाल्हनपुर, प्राथमिक विद्यालय पूरेकिरता, जंजीरादास शंभूनाथ सिंह इंटर कॉलेज एवं कई अन्य निजी कॉलेजों और स्कूलों तक जाने के लिए लोगों को करीब एक किलोमीटर का चक्कर लगाना पड़ता था। इससे राहत के लिए लोगों ने प्रशासन और स्थानीय प्रतिनिधियों से बीच में एक पुल की मांग रखी। यह मांग तीन दशक पहले से की जाती रही है। इसके बावजूद जब शासन और प्रशासन ने ग्रामीणों की मजबूरी को नजरंदाज किया तो ग्रामीणों ने जुगाड़ को ही रास्ता बना लिया। बांस, बल्ली रखकर पाल्हनपुर और नरहरपुर गांव में आने-जाने के लिए जुगाड़ू पुल तैयार किया गया। बता दें कि मजबूरी की वजह से इसी पुल से होकर करीब 30 हजार की आबादी गुजरती है। इसकी वजह से सबसे ज्यादा परेशानी स्कूली बच्चों और बुजुर्गों को उठानी पड़ती हैं। अब यह पुल काफी जर्जर हो चुका है, जिससे जब भी इससे कोई गुजरता है तो लकड़ी का पुल हिलने लगता है।

मजबूरन लेना पड़ता है लकड़ी के पुल का सहारा

ग्रामीण रामसेवक का कहना है कि कईबार विधायकों और प्रशासनिक अधिकारियों को इस समस्या के मद्देनजर शिकायती पत्र दिया गया लेकिन सुनवाई नहीं हुई। उन्हें अपने खेत में जाने के लिए मजबूरन लकड़ी के पुल का सहारा लेना पड़ता है। सरिता देवी ने बताया कि आबादी बढ़ने के साथ ही आवागमन में दिक्कतें होने लगी, जिसके बाद लकड़ी का पुल बनाना मजबूरी हो गया। हालांकि, यह हमेशा खतरे को दावत देता है। अभी तक तीन लोगों की पुल से गिरकर मौत हो चुकी है।

रिपोर्ट अमन वर्मा स्टेट कोआडिरनेटर न्यूज विजन उत्तर प्रदेश

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