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30 Mar 2018

महज आश्‍वासन पर खत्‍म कर दिया अन्‍ना ने अपना अनशन

Anna Hunger Strike Ends With Promises
सामाजिक कार्यकर्ता अन्ना हजारे ने पिछले 7 दिनों से जारी अपना अनशन गुरुवार शाम को खत्‍म कर दिया है. अनशन खत्‍म करते हुए अन्‍ना ने कहा कि सरकार ने उनकी मांगें मान ली हैं. वहीं, अन्‍ना ने धमकी दी कि अगर सरकार 6 महीने में इन मांगों पर कार्रवाई नहीं करती है तो वे फिर भूख हड़ताल करेंगे. अन्‍ना और उनके लोग इसे अपनी जीत बता रहे हैं, हालांकि अगर अन्‍ना के इस आंदोलन की तुलना उनके 2011 में दिल्‍ली और मुंबई के आंदोलन से करें तो यह काफी फीकी साबित हुई. ऐसे में सवाल उठ रहे हैं कि मजबूरी में तो अन्‍ना ने आंदोलन खत्‍म नहीं किया. जानें ऐसी वजहें जो इस ओर इशारा कर रही है:

बजट में हो चुकी है एमएसपी बढ़ाने की घोषणा

अन्‍ना ने जिन मांगों को लेकर केंद्र सरकार द्वारा हामी भरने की बात कह रहे हैं, वे मांगें तो खुद केंद्र सरकार काफी पहले ही मान चुकी है. अन्‍ना ने कहा कि केंद्र सरकार ने उनकी यह मांग मान ली कि कृषि उपज की लागत के आधार पर डेढ़ गुना ज्‍यादा दाम (MSP) मिले. आपको बता दें कि वित्त मंत्री के तौर पर अपना चौथा बजट पेश करते हुए अरुण जेटली ने ऐलान किया था कि वे उनकी पार्टी द्वारा 2014 के लोकसभा चुनाव के घोषणापत्र में किसानों को उनकी लागत का डेढ़ गुना न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) देने के वादे को पूरा कर रहे हैं. ऐसे में सरकार द्वारा यह मांग मान लेना कहना, एक तरह से छलावा ही है.

लोकपाल पर 4 साल से सरकार दे रही है आश्‍वासन

अन्‍ना ने कहा कि केंद्र ने यह भी आश्‍वासन दिया है कि वह जल्‍द लोकपाल की नियुक्‍त‍ि को लेकर निर्णय लेगी. आपको बता दें कि 2014 में चुने जाने के बाद से ही मोदी सरकार लोकपाल की नियुक्‍त‍ि को लेकर आश्‍वासन दे रही है. वहीं, हाल में ही केंद्र सरकार 1 मार्च को लोकपाल की नियुक्ति को लेकर सेलेक्शन कमेटी की बैठक की है. लोकपाल की सेलेक्शन कमेटी में पीएम मोदी, लोकसभा की स्पीकर सुमित्रा महाजन, देश के मुख्य न्यायधीश और लोकसभा में नेता विपक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे शामिल हैं. अन्‍ना का कहा कि सरकार ने उनकी मांगें मान ली है कि उस धारा को हटाया जाए कि लोकपाल प्रधानमंत्री, एमपी, एमएलए और कैबिनेट मिनिस्टर की जांच नहीं कर सकता. अन्‍ना के अनुसार सरकार के प्रतिनिधियों ने कहा है कि इस बारे में लोकसभा में संशोधन का प्रस्ताव आएगा.

सरकार ने नहीं दी कोई तवज्‍जो

2011 के अन्‍ना आंदोलन के दौरान तत्‍कालीन यूपीए सरकार लगातार अन्‍ना और उनके आंदोलन की कमेटी से बातचीत कर रही थी. उस समय लगातार केंद्र सरकार का प्रयास था कि अन्‍ना आंदोलन तोड़ दें. यूपीए के कई मंत्री लगातार अन्‍ना से बात कर रहे थे और आंदोलन पर नजर बनाए हुए थे. साथ ही यूपीए सरकार को अन्‍ना की कई मांगों के सामने झुकना भी पड़ा था. हालांकि इस बार ऐसा कोई नजारा नहीं दिखा. पीएमओ की ओर से अन्‍ना के आंदोलन को खत्‍म करने को लेकर कुछ प्रयास जरूर हुए, लेकिन कोई भी मंत्री या नेता अन्‍ना के इस आंदोलन पर न पहुंचा और न ही कोई बयान देता दिखाई दिया. अन्ना का आंदोलन खत्म कराने भी उनके गृह राज्य महाराष्ट्र के सीएम देवेंद्र फडणवीस और केंद्रीय कृषि राज्य मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत पहुंचे.

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