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3 Apr 2018

दलितों को नाराज करने वाली बड़ी घटनाएं मोदी राज में

Why Dalits Of India Angry With BJP

नई दिल्ली: अनुसूचित जाति, जनजाति अत्याचार निवावरण अधिनियम (एससी/एसटी एक्ट) को लेकर आए सुप्रीम कोर्ट के हालिया फैसले के विरोध में पूरे देश में दलित संगठनों ने भारत बंद के दौरान बड़े पैमाने पर हिंसा की जिसमें 5 लोगों की मौत हो गई। इसके इलावा सड़क और रेल यातायात बाधित हुआ और सारे कारोबार ठप्प रहे। आगजनी की घटनाओं की भी सूचनाएं हैं। दलितों के भारत बंद के सफल होने के बाद मोदी सरकार दलितों के सामने झुक गई और उसने सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर पुनर्विचार याचिका दायर की। हालांकि यह पहली बार नहीं है जब एनडीए सरकार को दलितों के सामने बैकफुट पर आना पड़ा है। इससे पहले भी कई ऐसे मामले सामने आए जहां पीएम मोदी को विरोध का सामना करना पड़ा है।

पुणे में दलित-मराठा हिंसा
इस साल के शुरू (एक जनवरी) होते ही महाराष्ट्र और पुणे भीमा-कोरेगांव की ऐतिहासिक लड़ाई की 200वीं सालगिरह पर हिंदुवादी संगठनों द्वारा दलितों पर हमला किया गया इस दौरान कई लोगों की मौत हो गई तो कई गंभीर रुप से घायल हो गए थे। इसके बाद दलित नेता प्रकाश अंबेडकर की अगुवाई में महाराष्ट्र बंद बुलाया गया था, जो देखते ही देखते हिंसक रुप ले लिया और देशभर में इसकी आलोचना होने लगी। मामला गरमाता देख मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस को सामने आना पड़ा जिसके बाद दलित नेताओं ने आंदोलन को वापस लिया।

ऊना में दलितों की पिटाई
दलितों पर अत्याचार यहीं नहीं था, 11 जुलाई 2016 में गुजरात के ऊना में गौरक्षक समिति के सदस्यों ने मृत गाय की चमड़ी निकालने की वजह से कुछ दलित युवकों को पीटा था, जिसका वीडियो भी खुब वायरल हुआ। इतना ही नहीं इस घटना से नाराज दलित युवकों ने उठाने से मना कर दिया। इसके बाद दलित नेता जिग्नेश मेवाणी ने आंदोलन किया जहां उन्हें मुस्लिमों का भी साथ मिला। मामला इतना संजीदा हो गया कि इसकी आवाज संसद तक गूंजने लगी, जिसके बाद मोदी सरकार को बैकफुट पर आना पड़ा। पीएम मोदी को इसका खामियाजा भी भुगता पड़ा। गुजरात चुनाव में जिग्नेश मेवाणी ने बीजेपी के खिलाफ प्रचार किया और चुनाव जीत विधानसभा में जा पहुंचे जो आज भी दलितों के हिल में सरकार के खिलाफ बयानबाजी देते रहते हैं।

रोहित वेमुला की आत्महत्या
हैदराबाद केंद्रीय विश्वविद्यालय से पीएचडी कर रहे दलित छात्र रोहित वेमुला ने 17 जनवरी 2016 को आत्महत्या कर ली, जिसके बाद कहा गया कि कॉलेज प्रशासन की कड़ी कार्रवाई की वजह से वेमुला ने आत्महत्या की। इसके बाद देशभर में एक बार फिर मोदी सरकार के खिलाफ दलितों ने हल्लाबोला और प्रदर्शन किया। दलितों के गुस्से को देखते हुए केंद्र सरकार मे कड़ी कार्रवाई के आदेश दिए।

हरियाणा में दलितों के घर जलाएं
मोदी सरकार के कार्यकाल में ही फरीदाबाद के सुनपेड़ गांव में एक दलित परिवार को जिंदा जला दिया गया, जिसमें दो बच्चों की मौत हो गई और कई लोग घायल भी हो गए। सुनपेड़ गांव में करीब 20 फीसदी दलित आबादी है और 60 फीसदी सवर्ण रहते हैं। इस घटना के बाद कहा जा रहा था कि सवर्ण परिवार के लड़के ने दलित परिवार को पुरानी रंजिश के चलते जिंदा जला दिया। इस मामले ने भी काफी तूल पकड़ी, जिसमें सरकार ने एक बार फिर कड़ी कार्रवाई के आदेश दिए।

मायावती का इस्तीफा
दलितों के हित में अक्सर बयान देने वाली बसपा चीफ मायावती ने गुस्से में राज्यसभा से इस्तीफा दे दिया था और आरोप लगाया था कि उन्हें बोलने नहीं दिया जाता। दरअसल, सदन में मायावती सहारनपुर हिंसा पर बोलने जा रही थीं, लेकिन वो बोल नहीं सकी, जिससे नाराज मायावती ने 18 जुलाई को लिखित रूप से राज्यसभा से इस्तीफा दे दिया था। मायावती का यह इस्तीफा विपक्ष के लिए हथियार बना। तभी तो मौका देखते ही मोदी सरकार की नीतियों पर ही सवाल उठा देते हैं।

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