केंद्रीय बजट 2026-27 के दिन भारतीय शेयर बाज़ार में तेज़ गिरावट देखने को मिली। बजट पेश होने के बाद सेंसेक्स और निफ्टी दोनों में कमजोरी दर्ज की गई, जिससे निवेशकों की चिंता बढ़ गई। बाज़ार विशेषज्ञों के अनुसार बजट से जुड़ी कई वजहों ने मिलकर बाज़ार पर दबाव बनाया
पहली वजह: टैक्स में कोई बड़ी राहत नहीं
निवेशक लंबे समय से कैपिटल गेन टैक्स, सिक्योरिटीज़ ट्रांजैक्शन टैक्स (STT) और शेयर बाज़ार से जुड़े अन्य करों में राहत की उम्मीद कर रहे थे। बजट में इन मोर्चों पर कोई बड़ा ऐलान न होने से बाज़ार की उम्मीदें टूट गईं।
दूसरी वजह: शेयर बाज़ार से जुड़े निवेश महंगे हुए
बजट में कुछ वित्तीय लेन-देन और निवेश गतिविधियों पर अतिरिक्त कर बोझ या सख़्ती के संकेत दिए गए। इससे खासकर शॉर्ट टर्म ट्रेडिंग और डेरिवेटिव्स से जुड़े निवेशकों में निराशा देखी गई।
तीसरी वजह: ‘बड़ी राहत’ की कमी
हालांकि सरकार ने मैन्युफैक्चरिंग, ग्रीन एनर्जी और दवाओं पर कस्टम ड्यूटी घटाने जैसे कदम उठाए, लेकिन शेयर बाज़ार को सीधे राहत देने वाले बड़े सुधार नहीं दिखे। इससे बाज़ार को बजट “न्यूट्रल से निगेटिव” लगा।
चौथी वजह: मुनाफ़ावसूली (Profit Booking)
बजट से पहले शेयर बाज़ार में तेज़ी देखने को मिली थी। बजट के दिन कई निवेशकों ने मुनाफ़ा सुरक्षित करने के लिए शेयर बेच दिए, जिससे बाज़ार पर अतिरिक्त दबाव बना।
पांचवीं वजह: विदेशी निवेशकों की सतर्कता
वैश्विक स्तर पर ब्याज दरों, डॉलर की मजबूती और भू-राजनीतिक हालात को लेकर विदेशी निवेशक (FII) पहले से सतर्क हैं। बजट से कोई बड़ा सकारात्मक संकेत न मिलने पर उन्होंने बिकवाली को तरजीह दी।
छठी वजह: मध्यम वर्ग और उपभोग पर सीमित फोकस
विशेषज्ञों का मानना है कि मध्यम वर्ग को टैक्स राहत न मिलने से उपभोग (Consumption) बढ़ने की उम्मीद कमजोर पड़ी, जिसका असर FMCG, ऑटो और रिटेल शेयरों पर दिखा।
सातवीं वजह: बजट से पहले बनी ऊँची उम्मीदें
बाज़ार में बजट से पहले उम्मीदें काफी ऊँची थीं। जब घोषणाएँ उम्मीदों पर खरी नहीं उतरीं, तो निराशा के कारण बिकवाली बढ़ गई।
आठवीं वजह: अनिश्चितता का माहौल
हालांकि सरकार ने ‘विकसित भारत 2047’ के लक्ष्य को दोहराया, लेकिन निवेशकों को तुरंत असर दिखाने वाले कदम कम नजर आए। इससे अल्पकालिक अनिश्चितता बनी रही।
निष्कर्ष
विशेषज्ञों का कहना है कि बजट के बाद की गिरावट घबराने की वजह नहीं है। लंबी अवधि में मजबूत आर्थिक बुनियाद, इंफ्रास्ट्रक्चर खर्च और ग्रीन एनर्जी जैसे सेक्टर बाज़ार को सहारा दे सकते हैं। हालांकि, अल्पकाल में शेयर बाज़ार में उतार-चढ़ाव बना रह सकता है।
Report: Dr. Siraj Khan +91 9589333311
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