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29 Jul 2018

हत्या पर आजीवन कारावास की सजा, पति पत्नी विवाद मामला

घटना है 2 सितंबर 2016 की रात तकरीबन 10:00 बजे आरती कोरी अपने घर पर थी, इसका घर तेवर भेड़ाघाट में था, पति का नाम सुरेंद्र कोरी वल्द केशव कोरी,  जिसकी उम्र 34 वर्ष थी,  मामूली कहासुनी पर बहस बाजी हुयी और आरोपी पति ने हसिया से अपनी पत्नी की गर्दन अलग कर दी, 

जिस पर थाना भेड़ाघाट के द्वारा अपराध पंजीबद्ध कर धारा 302 के तहत कार्यवाही की गई, विवेचक एफ एस मरकाम उप निरीक्षक और अपर लोक अभियोजक अशोक पटेल के तर्कों पर संतुष्ट होकर जबलपुर के न्यायाधीश आर आर बड़ोदिया के द्वारा आरोपी को भारतीय दंड विधान की धारा 302 के तहत आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई और ₹5000 जुर्माना ठोका गया, 

यह पहला मामला था, जिस पर लोक अभियोजक स्वस्थ होकर विवेचक उपनिरीक्षक के द्वारा भी परिस्थितियों का उल्लेख पुरे अभियोग पत्र में किया गया था, मौके पर गवाहों की गैरमौजूदगी के चलते वारदात को अंजाम देने वाले पति पर कार्यवाही सक्ती पूर्वक की गई तथा हर विषय वस्तु पर चिंतन,  मनन और जांच की गई,  जिनसे इस तरह की परिस्थितियों का निर्माण हुआ,  जिससे आरोपी पति ने अपनी नई ब्याहता  पत्नी को हंसिया से वार किया और पत्नी की मौके पर ही मौत हो गई, 

इस पूरे प्रकरण में आरोपी को माननीय न्यायाधीश के द्वारा सुनवाई का पूरा अवसर दिया गया परंतु कोई समाधानकारक जवाब नहीं मिलने से आरोपी को भारतीय दंड विधान की धारा 302 के तहत आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई


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