Special Investigation, हनी ट्रैप, ब्लैकमेलिंग, फिर सुसाइड: भय्यूजी की मौत पर कई राज बेपर्दा - News Vision India

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22 Jan 2019

Special Investigation, हनी ट्रैप, ब्लैकमेलिंग, फिर सुसाइड: भय्यूजी की मौत पर कई राज बेपर्दा

Bhayyu Ji Maharaj Suicide Case Full Detail Madhya Pradesh
आध्यात्मिक गुरु भय्यूजी महाराज की खुदकुशी के 7 महीने बाद बड़ा खुलासा हुआ है. पुलिस की माने तो भय्यूजी महाराज को एक लड़की ब्लैकमेल कर रही थी. और इस साजिश में भरोसेमंद सेवादार भी शामिल थे. पुलिस ने जो खुलासा खुदकुशी पर किया वो सन्न कर देने वाला है. पुलिस की मानें तो भय्यूजी महाराज को सुसाइड के लिए उकसाया गया. इस बात का खुलासा एक फोन कॉल से हुआ. साजिश के किरदारों के नाम तो और भी हैरान करने वाले हैं.

आरोपी नंबर वन है- सबसे खास सेवादार विनायक दुधाले.

आरोपी नंबर दो है- सेवादार शरद देशमुख.

तीसरी आरोपी है- भय्यूजी महाराज की सेक्रेटरी पलक.

वो जिंदगी का पाठ पढ़ाते थे. वो हर मंच से जीना सिखाते थे. लेकिन वो खुद हो गए साजिश के शिकार. अपनों ने उन्हें इस कदर उलझाया कि जिंदगी जीने का नाम कहने वाले भय्यूजी महाराज ने खुद ही मौत को गले लगा लिया. अपने ही आश्रम में अपनी लाइसेंसी रिवाल्वर से खुद को गोली मार ली.

इंदौर के डीआईजी हरिनारायणचारी मिश्रा के मुताबिक तीनों ने मिलकर ऐसी खौफनाक साजिश का चक्रव्यूह रचा कि भय्यूजी महाराज इस उसमें फंसते चले गए और उन्हें पता तक नहीं चला. और जब पानी सिर से ऊपर तक आ गया तो मौत के अलावा उन्हें कोई रास्ता नहीं दिखा. उन्हें ब्लैक मेल किया गया. भय्यूजी महाराज मानसिक तनाव में आ गए थे.

आरोपी नंबर वन सेवादार विनायक दुधाले पर भय्यूजी महाराज इस कदर भरोसा करते थे कि सुसाइड नोट के दूसरे पन्ने में अपने आश्रम, वित्तीय लेन-देन और सारी व्यवस्थाओं के लिए उन्हें ही जिम्मेदारी सौंपने की बात की थी. भय्यू जी की अंतिम यात्रा में दिख रहा था. वो लगातार रो रहा था. लेकिन उसकी करतूत सुनकर सबके होश उड़ गए. दरअसल,विनायक ही वो शख्स है. जिसने ना सिर्फ पलक को भय्यूजी महाराज पर शादी के लिए दबाव डालने का आरोप मढ़ा बल्कि उन्हें बदनाम करने की धमकियां भी दिलवाई. जब भय्यूजी महाराज मानसिक तौर पर परेशान हो गए. तो सबसे खास सबसे भरोसेमंद सेवादार विनायक ने ही उन्हें नशीली दवा दी.

दूसरे आरोपी सेवादार शरद देशमुख पर भी वही आरोप हैं जो विनायक पर हैं. भय्यूजी महाराज शरद को भी काफी मानते थे. लेकिन वो भी दगाबाजी कर रहा था.

बला की खूबसूरत पलक को मनप्रीत अरोड़ा नाम के एक शख्स ने भय्यूजी महाराज से मिलवाया था. जल्द ही पलक ने भय्यूजी का दिल जीत लिया. और उनकी सेक्रेटरी बन गई. लेकिन भय्यूजी महाराज की दूसरी शादी के बाद पलक दोनों सेवादारों की कठपुतली बन गई. दोनों सेवादारों के इशारे पर पहले पलक ने भय्यूजी महाराज की दूसरी शादी में हंगामा किया. और फिर आश्रम से निकाले जाने के बाद उन दोनों के इशारे पर ही भय्यूजी महाराज को ब्लैकमेल करने लगी.

डीआईजी मिश्रा के मुताबिक अपनों की साजिश से भय्यूजी महाराज को बदनामी का डर सताने लगा. कहते हैं कि दाती महाराज पर लगे रेप के आरोप के बाद सेवादारों ने ही उन्हें और डरा दिया. इनके बाद भय्यूजी महाराज इस कदर परेशान हुए कि 12 जून 2018 को अपने ही खुद को गोली मार ली.

7 महीने बाद भी भय्यूजी की खुदकुशी से हर कोई हैरान था. लेकिन तब पुलिस को कुछ भी संदिग्ध नहीं दिखा. पर एक महीने पहले पुलिस को फिरौती की कॉल की जो शिकायत मिली. उसके बाद खुदकुशी का सच सामने आन लगा. अध्यात्मिक गुरु भय्यूजी महाराज की मौत के बाद हर किसी की जुबान पर यही सवाल था कि आखिर भय्यूजी ने खुद अपनी जा क्यों ली. तब पुलिस ने भय्यू जी की पत्नी डॉ आयूषी की शिकायत पर शुरुआती जांच भी की. कई करीबी लोगों से पूछताछ भी की गई. लेकिन पुलिस को कोई ऐसी वजह नहीं मिली कि किसी पर शक किया जा सके.

सुसाइड नोट में भी शक वाली कोई बात नहीं दिखी. तो पुलिस ने भी मान लिया कि भय्यूजी की मौत खुदकुशी ही थी. लेकिन, पहले एक कॉल ने सब कुछ बदल दिया. महीने भर पहले भय्यूजी के आश्रम में ही एक फिरौती की कॉल आई. 5 करोड़ की फिरौती वाला ये फोन कॉल ट्रस्ट के वकील के पास आया. वकील ने पुलिस में शिकायत की. पुलिस की जांच में पता चला कि फोन आश्रम से ही आया था और फोन करने वाला कोई और नहीं बल्कि वहीं का पुराना ड्राइवर था. इस बारे में जांच आगे बढ़ी तो आश्रम के कई लोग घेरे में आ गए. जिनमें भय्यूजी महाराज का सबसे भरोसेमंद सेवादार विनायक भी शामिल था.

फिर पुलिस ने पूरे मामले में भय्यूजी के परिवार के लोगों से पूछताछ की. पुलिस फिरौती का मामला सुलझाने में लगी थी. और इसके बाद इस मामले के सारे तार भय्यूजी की खुदकुशी की साजिश से जुड़ते चले गए. अब तक घेरे में सेवादार विनायक, सेवादार शरद आ चुके थे. कड़ाई से पूछताछ में पूर्व सेक्रेटरी पलक की कलई भी खुल गई. पुलिस की मानें तो तीनों मिलकर भय्यूजी को ब्लैकमेल करने लगे थे.

ये हनी ट्रैप का पूरा गेम काफी शातिराना था. सेवादार विनायक डबल गेम खेल रहा था. वो साजिश का मास्टर माइंड भी था. और भय्यूजी महाराज का भरोसेमंद भी. उसी ने दूसरे सेवादार शरद को अपने पाले में किया. फिर पलक को मोहरा बनाया. पलक के पास आपत्तिजनक चैटिंग का स्क्रीनशॉट था. जिससे वो भय्यूजी को ब्लैकमेल कर रही थी.

पुलिस की माने तो भय्यूजी महाराज की दूसरी शादी की बात से ही सेवादार विनायक बौखला गया था. उसे लगा कि उसकी अब हैसियत खत्म हो जाएगी. पैसे का खेल भी बंद हो जाएगा. यही वजह है कि उसी के इशारे पर पलक ने भय्यूजी महाराज की दूसरी शादी में जमकर हंगामा किया. शादी के बाद विनायक खुलकर साजिश करने लगा. वो शरद के साथ मिलकर पलक को भड़काता था. उससे शादी के लिए दबाव डलवाता. भय्यूजी के सामने उनका बड़ा फिक्रमंद बना रहता है. उसकी भरकस कोशिश रहती थी कि पत्नी आयूषी भय्यूजी से दूर ही रहे. जब ब्लैकमेलिंग से भय्यूजी परेशान रहने लगे तो विनायक उन्हें नशीली दवा देने लगा. पुलिस की माने तो ब्लैकमेलिंग और नशीली दवा ने कॉकटेल का काम किया. और यही आध्यात्मिक गुरु की खुदकुशी का कारण बन गया.

Source: Aajtak

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