बेंगलुरु में कन्नड़ पत्रकार की गोली मार कर हत्या: देश के चौथे स्तम्भ में शोक व आक्रोश की लहर - News Vision - India News, Latest News India, Breaking India News Headlines, News In Hindi

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5 Sep 2017

बेंगलुरु में कन्नड़ पत्रकार की गोली मार कर हत्या: देश के चौथे स्तम्भ में शोक व आक्रोश की लहर



कन्नड़ पत्रकार गौरी लंकेश की मंगलवार को अज्ञात
लोगो ने गोली मार कर हत्या कर दी . गौरी अपने बेंगलुरु स्तिथ राजा राजेश्वरी, नगर निवास, में थी, वे  एक प्रसिद्ध कन्नड़ पत्रिका की मुख्य संपादक थी. गौरी के पिता पी. लंकेश एक प्रसिद्द कवी थे, जो बाद में पत्रकार बने. यह जानकारी प्राप्त हुयी है की अज्ञात हमलावरों के द्वारा गौरी को 3 गोलिया मारी गयी . उस समय वे अपने घर के बाहर खडीं थी. 3 गोलिया लगते ही गौरी मौके पर गिर गंयीं. उन्हें तत्काल समीपवर्ती हॉस्पिटल ले जाया गया. जंहाँ  डाक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया.  

पत्रकारों पर लगातार हो रहे हमलो की सभी पत्रकार संघो के द्वारा कड़ी निंदा की गयी है, साथ ही इस विषय में संघ  के द्वारा गौरी की हत्या के पीछे के राज उजागर करने हेतु C B I  जांच की मांग की जाएगी. इस हत्या के पीछे कुछ बड़े दिग्गज लोगो का हाथ होने की आशंका को नकारा नही जा सकता. हाल ही में गौरी के द्वारा प्रकाशित किये गए समाचारों का अवलोकन किया जायेगा. जो की हत्या की गुत्थी सुलझाने में मददगार साबित होंगे.

ASSITT. EDITOR  JITAINDRA MAKHIEJA 

10 comments:

  1. Patrkar yadi paisa khayge or kisi bebas ko fasayge to yahi hoga
    Kyoki patrkar ek dalalo ka dhanda ban gaya hai

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  2. शायद इन्होने पैसे नहीं खाए

    तभी गोली मार दी.

    अगर पैसे खा लेती तो हत्या नहीं होती.

    पुलिस को सब पता होगा की किसने मरवाया है पर वो पैसे खा कर सब रफा दफा कर देगी.

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    1. मैं आपके द्वारा किए गए व्यंग से सहमत नहीं हूं आपके द्वारा लिखा गया कमेंट बचकाना है एक मात्र पत्रकार ही है जो प्रजा और प्रशासन के बीच उचित समन्वय बनाकर रखता है जिससे अधिकारी वर्ग प्रजा पर अनावश्यक शक्ति नहीं दिखा पाते हैं अगर यह पत्रकार पीछे हट जाए तो आपको 200 साल पुरानी गुलामी का एहसास हो जाएगा पत्रकार का सम्मान कीजिए वह जैसा भी है उसमें आपका फायदा ही है उल्टा उसकी जान हमेशा जोखिम में रहती है

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  3. मैं आपके द्वारा किए गए व्यंग से सहमत नहीं हूं आपके द्वारा लिखा गया कमेंट बचकाना है एक मात्र पत्रकार ही है जो प्रजा और प्रशासन के बीच उचित समन्वय बनाकर रखता है जिससे अधिकारी वर्ग प्रजा पर अनावश्यक शक्ति नहीं दिखा पाते हैं अगर यह पत्रकार पीछे हट जाए तो आपको 200 साल पुरानी गुलामी का एहसास हो जाएगा पत्रकार का सम्मान कीजिए वह जैसा भी है उसमें आपका फायदा ही है उल्टा उसकी जान हमेशा जोखिम में रहती है

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  4. अपना इलाज़ कराओ और किसी भी पत्रकार के लिए एसा मत लिखना.

    Patrkar yadi paisa khayge or kisi bebas ko fasayge to yahi hoga
    Kyoki patrkar ek dalalo ka dhanda ban gaya hai

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  5. very sad incident.

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  6. पत्रकार सभी के लिए सॉफ्ट टारगेट होता है।जो महाशय कह रहे है कि पत्रकार मात्र पैसे खाने के लिए होता है तो कृपया बताएं कि आपने आज तक कितने पत्रकारों को पैसा खिलाया है।कुछ पत्रकार भी गलत हो सकते है लेकिन ऐसा कौन सा व्यवसाय है जहाँ सब के सब दूध के धुले है।इसलिए सतही टिपण्णी करने से पहले किसी भी विषय पर गंभीरता से विचार करें।हो सकता है कल को व्यवस्था से चौतरफा निराश होकर आपको भी किसी पत्रकार का ही मुंह ताकना पड़े।

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  7. पत्रकार सभी के लिए सॉफ्ट टारगेट होता है।जो महाशय कह रहे है कि पत्रकार मात्र पैसे खाने के लिए होता है तो कृपया बताएं कि आपने आज तक कितने पत्रकारों को पैसा खिलाया है।कुछ पत्रकार भी गलत हो सकते है लेकिन ऐसा कौन सा व्यवसाय है जहाँ सब के सब दूध के धुले है।इसलिए सतही टिपण्णी करने से पहले किसी भी विषय पर गंभीरता से विचार करें।हो सकता है कल को व्यवस्था से चौतरफा निराश होकर आपको भी किसी पत्रकार का ही मुंह ताकना पड़े।

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  8. पत्रकार जितने ज्यादा होंगे उतना ही देश का भला होगा । हर घर मे एक पत्रकार होना चाहिये । क़्योंकि देश के सुधार में कहीं ने कहीं पत्रकारों का भी बहुत बड़ा योगदान होता है । क्योंकि जिस घर यदि बाप न हो तो वो बेटा बिगड़ता जरूर है और जिस घर मे बाप होता है तो उसकी डर धमक से बेटे में काफी सुधार आता है अर्थात दुश्मन चाहे जितने भी हो यदि हर घर मे एक पत्रकार होगा तो वे पत्रकार मारने से पहले सोचेंगे कि इसको मारेंगे तो कोई हमें देख न ले । अबतक मारने वालों के साथ कई होते हैं लेकिन मरने वाला अकेला होता है ।

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  9. पत्रकार जितने ज्यादा होंगे उतना ही देश का भला होगा । हर घर मे एक पत्रकार होना चाहिये । क़्योंकि देश के सुधार में कहीं ने कहीं पत्रकारों का भी बहुत बड़ा योगदान होता है । क्योंकि जिस घर यदि बाप न हो तो वो बेटा बिगड़ता जरूर है और जिस घर मे बाप होता है तो उसकी डर धमक से बेटे में काफी सुधार आता है अर्थात दुश्मन चाहे जितने भी हो यदि हर घर मे एक पत्रकार होगा तो वे पत्रकार मारने से पहले सोचेंगे कि इसको मारेंगे तो कोई हमें देख न ले । अबतक मारने वालों के साथ कई होते हैं लेकिन मरने वाला अकेला होता है ।

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