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23 Dec 2017

बलात्कार 376 का आरोपी रिहा कर दिया महिला थाना प्रभारी ने,


बलात्कार 376 का आरोपी रिहा कर दिया महिला थाना प्रभारी ने

दैहिक शोषण दुराचार की पीड़िता 13 दिसंबर 2017 को शाम को 7:00 बजे पहुंची महिला थाना प्रभारी के समक्ष आवेदन लेकर पहुंचकर पता चला कि महिला थाना प्रभारी शाम को घर चली जाती हैं उपस्थित महिला अधिकारियों द्वारा पीड़िता का आवेदन लेकर कहा कल सुबह आ जाओ पीड़िता आई थी कटनी से

 पीडिता ने आवेदन में कहा है की अंकित पमनानी जो मंडला का मूलत निवासी है, जिसने शादी का झांसा दे कर उसके साथ लगतार 3 वर्षो तक किया है दुराचार,   बार कर चूका है आरोपी युवती से शादी करने को लेके आत्मदाह का प्रयास, सारा वृतांत बताया है युवती ने आवेदन में

पीडिता को कहा कल दोपहर में आओ आज कोई कार्यवाही नहीं हो सकती और पीड़िता को आवेदन की पावती नहीं दी

मामले में आया नया मोड़

14 दिसंबर 2017 को महिला थाना प्रभारी ने आवेदन पर कार्यवाही करते हुए आवेदन में दिए गए पते से आरोपी को गिरफ्तार किया और थाने ले जाया गया

गैर जमानती अपराध पर महिला थाना प्रभारी ने 14 तारीख की शाम को आरोपी को रिहा कर दिया

दिन में महिला थाना प्रभारी ने गिरफ्तारी की पुष्टि की थी  
विडियो

पत्रकार वार्ता में दिया था बयान की गैर जमानती अपराध के अंतर्गत प्राप्त शिकायत पर जांच करते हुए आरोपी को गिरफ्तार किया जा चुका है  फिर शाम को कैसे रहा हुआ आरोपी

15 तारीख दोपहर शाम तक दर्ज नहीं हुई थी प्राथमिकी, महिला के द्वारा दिनांक 14-12 -2017 को रात्रि ऑनलाइन FIR मध्य प्रदेश पुलिस डिपार्टमेंट के पोर्टल पर दर्ज की गई थी साथ ही पुलिस अधीक्षक महोदय को महिला थाना प्रभारी की आरोपी के पक्ष में की जा रही कार्रवाई से अवगत कराया था, साथ ही निवेदन किया गया था कि निष्पक्ष जांच के लिए किसी सत्यनिष्ठ अधिकारी को नियुक्त किया जाए परंतु ऐसा हो न सका

देर शाम 15 दिसंबर 2017 को एडिशनल SP के आदेश पर बमुश्किल महिला थाना प्रभारी सुष्मिता नियोगी ने आवेदिका के आवेदन में निहित तथ्यों को दरकिनार करते हुए डायरेक्ट मौखिक औपचारिकता पूर्ण FIR दर्ज की जिसमें संपूर्ण घटनाक्रम का मात्र 10 फ़ीसदी उल्लेख रहा

पीड़ित महिला के द्वारा जनसुनवाई में उपस्थित होकर पुलिस अधीक्षक महोदय को संपूर्ण वृतांत से वाकिफ कराया गया, जहां पर पुलिस अधीक्षक महोदय द्वारा पीड़िता को आश्वासन देते हुए महिला थाना प्रभारी सुष्मिता नियोगी द्वारा की जा रही एक पक्षीय आरोपी के पक्ष में की जा रही कार्यवाही पर जांच करने हेतु कोतवाली सीएसपी को आवश्यक निर्देश जारी किये, जिस पर दूसरे दिन पीड़िता के बयान कोतवाली CSP द्वारा लिए गए परंतु प्रकरण अभी किसी जिम्मेदार अधिकारी को हस्तांतरित करने के आदेश की सूचना प्राप्त नहीं है
वास्तविकता में देखा जाए इस तरह की कार्यवाहियों आरोपियों के पक्ष में उन्हें रियायत दिलाने हेतु अक्सर निरीक्षण करता जांच अधिकारी द्वारा की जाती रही है जिससे आवेदक पीड़ित परेशान होते रहते हैं

न्याय मिलेगा मात्र न्यायालय में
यह डायलोग कभी गलत नही हो सकता  :-  I Will See You In Court

पीडितो को भरोसा हमेशा से मात्र न्यायालय पर रहा है जो कायम है और रहेगा
पुलिस द्वारा की जा रही कार्यवाही आरोपी के पक्ष में खड़े रसूखदारों से हो रही है प्रभावित. गैर जमानती अपराध में भी पुलिस नहीं कर रही गिरफ्तारी आरोपी के मोबाइल नंबर के आधार पर उसकी लोकेशन नहीं की जा रही ट्रेस , ना ही  पता किया जा रहा है किसकी शरण में आरोपी अभी तक फरारी काट रहा है उसके बैंक अकाउंट से निकलने वाले रुपए जैसी अन्य ऑनलाइन सेवाओं का लाभ लेकर के आरोपी अपनी फरारी काट रहा है, पुलिस को किसी प्रकार की जिम्मेदारी का एहसास नहीं है, यहाँ  न्यायतंत्र हो रहा है शर्मसार जिससे यह एहसास और अंदाज लगाया जा सकता है कि किस प्रकार से पीड़िता का प्रकरण नयायालय में प्रस्तुत किया जाएगा और आरोपी को मिलने वाले संदेह के लाभ पर उसे विद्वानों द्वारा चैलेंज किया जाएगा जहां पर पीड़िता को मात्र एक अंतिम भरोसा है वह न्याय का मंदिर मात्र न्यायालय है
पुलिस अधीक्षक महोदय को आवश्यक रूप से सुचारु रूप से न्याय व्यवस्था को लागू रखने के लिए महिला थाना प्रभारी के स्थान पर किसी जिम्मेदार जुझारू कर्मठ और सत्यनिष्ठ अधिकारी की नियुक्ति करना आज की जरुरत आन पड़ी है

पीडिता ने जनसुवाई में लगाये आरोप

13 दिसंबर 2017 को पीड़िता ने आवेदन प्रस्तुत किया प्राथमिकी दर्ज हुई 15 दिसंबर 2017 को देर शाम तक वह भी पुलिस अधीक्षक के फोन के बाद,
पीडिता का कहना है की २ दिन तक महिला थाना प्रभारी ने बार बार आरोपी पक्ष के रिश्तेदारों से बात कर मामला सुलझाने कहा गया,
आरोपी ने फिर दिया था थाने में शादी का झांसा,
महिला थाना प्रभारी नही पीडिता को मनोबल तो नही दिया अपितु उस भाषा का प्रयोग किया जिससे पीड़ित हो कर पीडिता ने कप्तान के समक्ष गुहार लगाई,
आरोपी के मामा ने कहा 1 हफ्ते में शादी करा देते है, आवेदन में हस्ताक्षर कर दो
जिस पर थाना प्रभारी द्वारा प्रभवि रूपसे हस्ताक्षरित कराया गया, जिसकी प्रथक शिकायत पीडिता ने की है पुलिस कप्तान से, पीडिता ने वापस माँगा था वो पेपर जिस पर दिया गया ब्यान थाना प्रभारी का ये है विडिओ ( कल आओ अब कल देखते है )   


प्रदेश के मुखिया ने किए हैं वादे
महिला सशक्तिकरण के लिए विधेयक बनाया गया है जिसमें आरोपियों के विरुद्ध नई सजा का ऐलान है
लोक सेवा गारंटी अधिनियम, प्रमुख सचिव द्वारा जनहित में शिकायत निवारण हेतु पारित अधिसूचनाएं फिलहाल व्यर्थ साबित हो रही हैं रसूखदारों की पकड़ के सामने

बलात्कारी के विरुद्ध की जाने वाली आवश्यक कार्यवाहियाँ

दर्ज गैर जमानती अपराध में आरोपी को तत्काल गिरफ्तार कर न्यायालय में पेश किया जाना था,
घटनास्थलो पर जा कर पुलिस द्वारा श्हिनाख्त कराई जा चुकी है, महिला ने बताया आरोपी के घर का पंचशील नगर निवास का पता, 
थाना ओमती अंतर्गत होटलों के रिकॉर्ड नही लिए गए है अभी तक, 
आरोपी ने युवती से शादी के चलते २ बार किया है आत्मदाह का प्रयास, 
गिरफ्तारी तो की गई परंतु औपचारिक, किस प्रतिभूति / गारंटी पर उसे छोड़ा गया इसका उल्लेख प्रकरण में नहीं
जांचकर्ता अधिकारी की संदिग्ध भूमिका,
पुलिस की कार्यवाही पर रसूखदार भारी पड़े ,
नियमित रूप से अन्य मामलों में की गई कार्यवाहीया जिससे इस प्रकरण में की गई कार्यवाही उसे अगर मिलान किया जाए तो उसका फर्क नियमानुसार की जा रही कार्यवाही उसे 100 फ़ीसदी प्रतिकूल रहेगा
नियमित रूप से आरोपी की पतासाजी और गिरफ्तारी के विषय में उठाए गए कदम जिनके रिकॉर्ड संधारित किए गए होंगे उन की विवेचना महत्वपूर्ण तथ्य के रूप में प्रकरण में की गई विषयानुकूल कार्यवाहीयों को प्रकट करेगा,

फ़िलहाल पीडिता के द्वारा पुलिस अधीक्षक जबलपुर को दिए गए आवेदन , CM हेल्पलाइन पर दी गई शिकायत व ऑनलाइन प्राथमिकी, उप पोलिस अधीक्षक द्वारा लिए गए ब्यान, और गिरफ्तारी के सम्बन्ध में प्रभारी द्ववारा दिए गये बयान को प्रकरण का हिसाब बनाया गया है की नही सब रहस्य है, जो न्यायालय को गुमराह करने हेतु भी किये जा सकते है, 


     Chief Editor Dr Siraj Khan          



               


          Editor Jitaindra Makhieja 

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