केंद्र-राज्य ने तीन साल से नहीं दिया 636 किसानों का फसल बीमा - News Vision India News Latest News India Breaking India News Headlines News In Hindi

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5 Feb 2018

केंद्र-राज्य ने तीन साल से नहीं दिया 636 किसानों का फसल बीमा

Center and state didn't payed Farmers Insurance premium
इंदौर। एक तरफ सरकार प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना की तारीफ करते नहीं थकती, लेकिन दूसरी तरफ मप्र के इंदौर जिले के 636 किसानों की पीड़ा इस योजना की पोल खोल रही है। केंद्र और राज्य सरकार की उलझन से तीन साल पहले नुकसान हुई फसल की बीमा राशि भी किसानों के हाथ में नहीं आई है।

एग्रीकल्चर इंश्योरेंस कंपनी ऑफ इंडिया के डाटा में हुई चूक का खामियाजा किसान अब तक उठा रहे हैं। सरकारी सिस्टम की खामी में इन किसानों के 1.34 करोड़ रुपए फंसे हुए हैं। इंतजार की हद होने के बाद जिले के कम्पेल गांव की सहकारी संस्था के किसानों ने तो केंद्र, प्रदेश और इंश्योरेंस कंपनी के खिलाफ हाई कोर्ट में याचिका लगा दी है।

इंदौर प्रीमियर को-ऑपरेटिव बैंक (आईपीसी) के जरिये सहकारी संस्थाओं से खेती का कर्ज लेने वाले किसानों को इंश्योरेंस कंपनी से बीमा लेना अनिवार्य किया गया था। योजना में वर्ष 2015-16 में भी किसानों ने प्रीमियम राशि जमा की। उस दौरान इंदौर जिले में सोयाबीन की फसल को भारी नुकसान हुआ। नुकसानी के तौर पर कई किसानों को मुआवजा मिला, लेकिन जिले की इंदौर और महू तहसील के 7 पटवारी हल्कों के विभिन्न गांवों के किसान बीमा राशि से वंचित रह गए।

इनमें कम्पेल, पेड़मी, सिवनी, पिवड़ाय, बावलिया, धमनाय, खुड़ैल खुर्द, पिगडंबर, सोनवाय, भैंसलाय सहित अन्य गांवों के किसान शामिल हैं। कम्पेल सेवा सहकारी संस्था के पूर्व अध्यक्ष रवींद्र दुबे ने बताया कि हमारी सोसायटी के करीब 250 किसानों को फसल बीमा नहीं मिला है। आईपीसी बैंक से बात हुई तो पता चला कि केंद्र और राज्य सरकार का अनुदान नहीं मिला है।

इंतजार करते-करते एक महीने पहले हमने केंद्र व राज्य शासन और इंश्योरेंस कंपनी के खिलाफ हाई कोर्ट में केस लगा दिया है। कंपनी को नोटिस तामील हो गया है। सांसद प्रतिनिधि और आईपीसी बैंक के डायरेक्टर देवराजसिंह परिहार, कंचनसिंह चौहान ने हाल ही में प्रदेश के वित्त मंत्री जयंत मलैया से भी इस मामले में हस्तक्षेप की मांग की है। वित्त मंत्री ने बताया कि वे बैंक डायरेक्टरों के साथ भोपाल में इंश्योरेंस कंपनी के अधिकारियों से बात कर बीमा राशि मिलने की रुकावट दूर करेंगे। यदि राज्य का हिस्सा नहीं मिला है तो वह दिलवाया जाएगा।

पैसा नहीं आया तो कंपनी ने लौटा दी थी किसानों की प्रीमियम

- आईपीसी बैंक ने जिले के सभी ऋ णी किसानों की प्रीमियम इंश्योरेंस कंपनी को भेज दी थी। जब बीमा राशि आई तो कई किसानों के नाम ही नहीं थे। इस पर कंपनी ने बचे किसानों की प्रीमियम राशि बैंक को लौटा दी। इस पर बैंक ने आपत्ति ली तो पता चला कि कंपनी की ओर से डाटा इंट्री और केलकुलेशन में चूक से ऐसा हुआ।

- बैंक ने अपने दस्तावेजी सबूत और डिक्लेयरेशन पेश किए तो कंपनी ने अपनी गलती मानी और वह किसानों की प्रीमियम वापस लेने को तैयार हुई। कंपनी ने गलती सुधारी और फाइल दिल्ली भेजी। बताया जाता है कि अब राज्य का हिस्सा नहीं मिल पा रहा है।

- कांग्रेस के जिलाध्यक्ष सदाशिव यादव ने बताया कि बैंक का प्रतिनिधि होने के नाते मैंने आमसभा में भी किसानों की समस्या रखी। बैंक प्रबंधन से पूछा कि किसकी गलती से ये हुआ, लेकिन कोई जवाब देने को तैयार नहीं है।

- सिवनी के प्रभावित किसान बच्चन सेठ बताते हैं, हम हर आने वाले मंत्री और अधिकारी को अपनी समस्या बता चुके हैं लेकिन राशि नहीं मिली। यदि ऐसा ही करना है तो सरकार और बैंक हर साल जबर्दस्ती प्रीमियम क्यों जमा कराते हैं।

#FarmersInsurancePremiumNotPayedByCenterState,

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