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12 Jun 2018

दगाबाज बिल्डर पर सीधी FIR दर्ज, RERA के तहत कार्यवाही अलग से होगी

Fraud FIR Against Bhopal Builder

F.I.R.  Against   "Fraud"  Builder at Bhopal

आवेदक पीड़ित असीम राज जार्ज निवासी सदर जबलपुर ने भोपाल के बिल्डर जितेंद्र ममतानी जिसका प्रोजेक्ट IKON DWELING PVT LTS. / IKON MERIDIAN के नाम से बहुमंजिला इमारत का निर्माण कराया जाकर प्रचार प्रसार कराया गया था, जिसमें पीड़ित असीम राज के द्वारा कुल 1300000 रुपए में फ्लैट नंबर 206 का एग्रीमेंट किया गया था, जिसमें उसके द्वारा एडवांस भुगतान 300000 किया गया था बाकि 1000000 रुपए का लोन लेकर शेष रकम चुकता की गई थी, जब कब्जे की और रजिस्ट्री की बारी आई तब खरीददार पीड़ित आसींम राज को पता चला कि धोखेबाज बिल्डर जितेंद्र ममतानी ने वह फ्लाइट भोपाल के ही निवासी राकेश सराठे को बेच दिया गया है,  जिसकी रजिस्ट्री भी कर दी गई है और कब्जा भी उसको दे दिया गया है,  इस मौके पर सभी दस्तावेज इकट्ठे किए गए और उस पर वैधानिक प्रक्रियाओं का पालन करते हुए सभी आवश्यक विषय संबंधित दस्तावेजों के प्रमाणित पत्रों के साथ शिकायत पत्र जहांगीराबाद थाना भोपाल में उचित कार्यवाही हेतु प्रस्तुत किए गए,  जिस पर तत्काल प्रभाव से भारतीय दंड विधान की धारा धोखाधड़ी 420 और 406 “अमानत में खयानत” का मामला पाते हुए प्रकरण दर्ज किया गया और जांच शुरू की गई आरोपी की गिरफ्तारी के प्रयास पुलिस कर रही है जल्द ही उसकी गिरफ्तारी की संभावना है.

रेरा के तहत होगी अलग से कार्यवाही

पीड़ित के द्वारा धोखेबाज बिल्डर के विरुद्ध केंद्रीय अधिनियम धारा के तहत भी प्रकरण न्यायालय में अलग से प्रस्तुत किया जाएगा, जिसमें कई प्रकार से शास्त्री के प्रावधान भी हैं, जिसके तहत बिल्डर को अच्छा खासा मुआवजा राशि का भुगतान खरीदार को करना पड़ सकता है साथ ही उसे सजा होने की भी संभावना है

FIR के प्रभाव क्या हो सकते हैं

पीड़ित ने सर्वप्रथम जहांगीराबाद थाने में प्राथमिकी दर्ज कराई सभी आवश्यक प्रमाण दस्तावेजों के साथ और रेरा के तहत जल्दी ही कार्यवाही करने के उपरांत बिल्डर के विरुद्ध चल रही कार्यवाही के उपक्रम में अगला पड़ाव उसके कॉलोनाइजर लाइसेंस को रद्द करने हेतु संबंधित विभाग को आवेदन पत्र प्रस्तुत किया जाएगा ताकि बिल्डर किसी अन्य व्यक्ति के साथ धोखा ना कर सके

भोपाल नगर निगम की जिम्मेदारी भी नियुक्त होगी

इस प्रोजेक्ट में नक्शा स्वीकृति के उपरांत नगर निगम हर प्रकार से होने वाली धोखाधड़ी को जनहित में सुरक्षित करने हेतु कई फ्लैट अपने पास सुरक्षित अधिपत्य में ले लेता है, जिस पर कि आने वाले समय में नगर निगम की ओर से भी अधिग्रहित किए गए फ्लैटों पर कार्यवाही की जा सकेगी, जिन्हें पीड़ित रेरा के तहत भोपाल नगर निगम को भी पार्टी बनाएगा और नगर निगम के द्वारा अधिग्रहित किए गए फ्लैट में से एक फ्लैट पीड़ित को भी मुआवजे के रूप में प्राप्त हो सकेगा, नियमो और शर्तो के उलंघन में यह सभी संयुक्त कार्यवाहियाँ न्याय तंत्र में अनोखा और सटीक निर्णय दर्ज कर सकेंगी. 

एक FIR और भी हो सकती है वहां के उपपंजीयक के विरुद्ध

इस पूरे प्रकरण में बड़े आश्चर्य की घटना है कि उपपंजीयक ने आर्किटेक्ट नगर निगम भवन शाखा और स्वीकृत नक्शे में दिए गए मापदंडों के बिना अनुसरण किए बिना कंप्लीशन सर्टिफिकेट के कैसे रजिस्ट्री कर दी इस प्रकरण में बिना कंपटीशन वर्क सेटलमेंट के रजिस्ट्री अपने आप में निष्पादन करना जुर्म है जिसमें एंटी करप्शन एक्ट 13 खंड 1 और 13 खंड 2 के तहत उपपंजीयक के विरुद्ध भी तत्काल प्रभाव से प्राथमिकी दर्ज की जानी चाहिए

फिलहाल मामला पुलिस ने विवेचना में लिया है, पुलिस की योग्यता मामले को एक न्यायोचित दिशा दे सकती है,  आरोपी की गिरफ्तारी की संभावना चल रहे हैं और भी इसमें कड़ियां जुड़ सकती हैं संभावना है इसमें नगर निगम भवन शाखा और आर सी ट्रक की मिलीभगत भी हो सकती है जिनके नाम भी FIR में आने वाले समय में जोड़े जा सकते हैं साथ ही आरोपी धोखेबाज बिल्डर के द्वारा खरीददार को धोखा दिया जा कर जिनके नहीं दस्तावेजों का जानबूझकर निर्माण किया गया है जिनके सत्यापन के बाद इस प्रकरण में भारतीय दंड विधान की धारा 467, 468, 471 का इजाफा भी हो सकता है

आयकर अधिनियम 1961 के तहत भी बिल्डर के विरुद्ध कार्यवाही की जा सकती है जिसमें 1300000 रूपय फोकट के उसके अकाउंट में आए जिसको उसने वित्तीय वर्ष 2016 17 में क्या दर्शाया होगा जिसमें निरुत्तर है बिल्डर उत्तर देने में इस पूरी रकम पर भी उसे कम से कम 5 से 700000 टैक्स भरना पड़ सकता है

बिल्डर ने वैट एक्ट और जीएसटी के एक्ट में भी करी होगी चोरी

बिना वर्क कंप्लीशन सर्टिफिकेट के अगर किसी फ्लैट की रजिस्ट्री हो सकती है तो इस विषय में कोई संदेह नहीं है कि उसमें आने वाला जीएसटी और बेड का कर इस बिल्डर के द्वारा इमानदारी से सरकारी खजाने में जमा कराया गया हो इस अधिनियम के तहत जिस फ्लैट की कीमत 1000000 रुपए है उस पर निर्माण में खर्च की गई 60% राशि पर क्रेता से कर वसूला जाना प्रावधानित है जो रेरा के तहत अलग से माध्यम अधिसूचना के केंद्र सरकार के द्वारा और घोषित किया गया है परंतु बिल्डर इतने होशियार हैं जो अपने ही ग्राहकों के साथ धोखा बाजी करते हैं और वह हंड्रेड परसेंट कीमत पर पूरा टैक्स वसूलते हैं जो उनकी पूरी जेब में जाता है और जो माल उन्होंने खरीदा है उसका वह आदत कर दावा भी प्राप्त कर लेते हैं इस प्रकार बिल्डरों के मुनाफे में होती है गजब की कमाई

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