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19 Nov 2018

लोकतंत्र में राजनीति के बदलते स्वरूप से बढ़ती समस्याओं एवं छत्तीसगढ़ चुनाव में नक्सली हमलों में तेजी पर विशेष

News Vision India Article On Chhattisgarh Election 2018
साथियों नमस्कार,
लोकतंत्र में सत्ता चलाने के लिए राजनीति को माध्यम बनाया गया है और राजनीति के माध्यम से जनमत के आधार पर बहुमत पाने वाले को सरकार चलाने की जिम्मेदारी सौंप दी जाती है। राजनीति के लिये राजनैतिक दलों का गठन करके उसे अपने विचारों एवं कार्यों से जनता को प्रभावित कर समर्थन एवं मतदान के समय मत देने की व्यवस्था लोकतांत्रिक प्रणाली में आधार मानी गई है। राजनैतिक दलों को समाज को एकजुट एक राष्ट्रभाषा में बांधे रखने की जिम्मेदारी राजनैतिक दलों को दी गया है।

राष्ट्रीय एकता अखंडता और रामराज्य जैसी सरकार बनाने की व्यवस्था के साथ ही समाज के धर्मनिरपेक्ष स्वरूप को बनाये रखने की भी जिम्मेदारी राजनैतिक दलों को दी गई। लोकतंत्र में राजनैतिक दलों को समाजिक सौहार्द तोड़कर एवं धर्म सम्प्रदाय, जात पांत नक्सवाद को सरंक्षण देकर देश को कमजोर करने का अधिकार नहीं दिया गया है। यह कहना उचित होगा कि आजादी के बाद से जो भी समस्याएं देश में नई पैदा हुयी उसके लिए पूर्ण रूप से राजनैतिक दलों की वोट पाने की नीति ही जिम्मेदार मानी जायेगी। जम्मू कश्मीर समस्या से पैदा आतंकवाद एवं अपने ही लोगों की बगावत का दूसरा नाम नक्सलवाद की गतिविधियों में लगातार वृद्धि के लिए राजनीति को जिम्मेदार माना जा सकता है। लोकतंत्र में उत्पीड़न की अंतिम सीमा बगावत होती है और जो बागी हो जाता है उसे राष्ट्र द्रोही करार दे दिया जाता है।

देश के कई राज्यों में तेजी से जड़ जमा रहे नक्सलवाद के चलते जैसे अघोषित युद्ध हो रहा है इसके बावजूद नक्सलियों के हमलों में कमी न आना कही का कहीं से राजनैतिक दाल में काला तो जरूर लगता है।इस समय नक्सल प्रभावित छत्तीसगढ़ में सरकार लम्बे अरसे से नक्सलियों का सर्वनाश करने के लिए विशेष अभियान चला रही है इसके बावजूद उनके हमलों में कमी आने की जगह तेजी आती जा रही है और इस समय हो रहे चुनाव के दौरान उन्होंने जैसे अभियान ही छेड़ दिया है। अब तक दो बड़े हमले हमारे सुरक्षा बलों को लक्ष्य बनाकर कर चुके हैं। एक तरफ नक्सली हमले हो रहे हैं तो दूसरी तरफ वहाँ पर हो रहे विधानसभा चुनाव के दौरान मुख्य राजनैतिक दल एक दूसरे पर नक्सलियों को संरक्षण देने के आरोप लगाकर चुनावी लाभ लेने का प्रयास कर रहे हैं।

इस समय छत्तीसगढ़ में हो रहे चुनाव में नक्सलवाद एक मुख्य मुद्दा बन गया है जबकि नक्सलियों के हमलों से चुनावी माहौल को बचा पाना सरकार और सुरक्षा बलों के लिये एक चुनौती बना हुआ है। समस्या एक बीमारी या फोड़े जैसी होती है जिसका समय पर इलाज अथवा आपरेशन कराकर उसे नासूर या कैंसर बनने से बचाना जरूरी होता है क्योंकि जब बीमारी लाइलाज हो जाती है तो जान जोखिम में पड़ जाती है। नक्सली अपने ही देश राज्य के हैं कही पाकिस्तान से तो आये नहीं है आखिर इनकी संख्या में वृद्धि क्यों हो रही है यह एक विचारणीय प्रश्न है लेकिन इस देश में चुनाव के समय सारे मुद्दे उभरकर हमदर्दी के रूप में आते हैं और चुनाव बाद समाप्त हो जाते हैं। देश की एकता अखंडता सुरक्षा से जुड़े मुद्दों के सहारे राजनैतिक रोटियाँ सेकने की जगह ऐसे मामलों की जड़मूल से समाप्त करने की जरुरत देशहित में है। धन्यवाद।।

लखनऊ से भानू मिश्रा स्टेट हेड न्यूज विजन की छत्तीसगढ नक्सलियो पर राजनैतिक रोटियां सेंकने पर सम्पादकीय

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