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13 Nov 2018

चुनाव आयोग ध्यान दे तो, कई के नामांकन रद्द हो जाये, रिटर्निंग अधिकारी ने कैसे स्वीकारे फ़ार्म

national issue election 2018
राष्ट्रीय राजनीतिक दलों के द्वारा चीफ इलेक्टरल ऑफीसर मध्य प्रदेश को फार्म उपलब्ध कराया गया है, जिसमें उनके द्वारा राज्य स्तर पर नियुक्त किए गए राजनीतिक दल की ओर से सभी कार्रवाइयों के निष्पादन हेतु एक प्रतिनिधि को नियुक्त किया गया है, इसकी सूचना सभी राष्ट्रीय कृत राजनीतिक दलों ने विधिवत प्रदान की है

 प्रारूप – ख,  जिसमें की राजनीतिक दल के द्वारा प्रत्येक विधानसभा में अधिकृत किए गए अभ्यर्थी का नाम भरकर साथ ही विधानसभा का क्रमांक जिला और दिशा क्षेत्रफल बताया जा कर रिटर्निंग ऑफिसर को सूचित किया गया है जो कि विधिवत किया गया है

अभी विधिवत शब्द बड़ा उलझा हुआ सा है
सोशल मीडिया पर कई अभ्यर्थियों के प्रारूप सूचना पत्र जो कि राष्ट्रीय कृत राजनीतिक दलों के द्वारा रिटर्निंग ऑफिसर को उपलब्ध कराई जानकारी के अनुसार यह है कि राष्ट्रीयकृत राजनीतिक दल की ओर से किसे किस क्षेत्र से नामांकन हेतु किस अभ्यर्थी को राजनीतिक दल के द्वारा चुना गया है इसकी सूचना दी जा रही है

परंतु अत्यंत विचारणीय तथ्य यह है कि राजनीतिक दलों के द्वारा किए गए पत्राचार में जारी किए जा रहे सूचना पत्रों में कहीं पर भी राजनीतिक दल का पंजीयन क्रमांक उपलब्ध नहीं है    क्यों  ?  कैसे स्वीकार कर लिए गए यह सारे फार्म 

तथा राष्ट्रीय कृत राजनैतिक दल की ओर से नामांकन भरने वाले अभ्यर्थियों को राष्ट्रीय कृत राजनीतिक दल की ओर से जारी किए गए प्रारूप में भी कहीं पर राष्ट्रीय कृत राजनीतिक दल का पंजीयन क्रमांक उल्लेखित नहीं है,

 यह राष्ट्रीय कृत राजनैतिक दल पंजीकृत है भी या नहीं, क्या  केवल अपने प्रतीक/SYMBOL  पर चुनाव लड़ रहा है

. राष्ट्रीय कृत राजनीतिक दल में पदस्थ किए गए प्राधिकारियो  को विधिवत समिति में एसोसिएशन में जहां कहीं से भी वे पंजीकृत हैं,  वहां पर उनके नाम अपडेट है, भी कि नहीं अगर है, तो राष्ट्रीय कृत राजनीतिक दल के द्वारा जारी किए जा रहे सूचना पत्रों एवं पत्रों पर राजनीतिक दल का पंजीयन क्रमांक उपलब्ध क्यों नहीं है, और कहां से वह पंजीकृत है, इसका उल्लेख क्यों नहीं है, जिस किसी विभाग से यह पंजीकृत है, वह वर्तमान में कार्य कर रही टीम और नियुक्त की जाने वाली टीम का वर्तमान रिकॉर्ड दुरुस्त है या नहीं, जिन्हें नियुक्त किया गया है वर्तमान में प्रदेश स्तर पर, नियोक्ता खुद अधिकृत है या नहीं, जहा से यह दल पंजीकृत है वह से RETURNING OFFICER / CHIEF ELECTORAL OFFICER ने रिकॉर्ड मिलवाया की नही, इन सभी आवश्यक तत्वों के अभाव में तत्काल प्रभाव से अभ्यर्थियों का नामांकन निरस्त करने योग्य है

प्रदेश की जनता को यह नहीं मालूम कि उनके पास वोट मांगने आने वाला नेता जिस किसी संगठन से राष्ट्रीय कृत दल से संबंध रखता है, उसका अपना खुद का रजिस्ट्रेशन पंजीयन प्रमाण / क्रमांक क्या है,  एवं उसके बारे में वोटर को कोई भी जानकारी उपलब्ध नहीं कराई जा रही है

सूचना अधिकार अधिनियम 2005 के तहत राष्ट्रीय राजनीतिक दलों को परे रखा गया है इस अधिनियम के तहत राजनैतिक दलों के लेखा-जोखा मांगने का अधिकार आम आदमी के पास नहीं है,  लिहाजा जो दल अपने बारे में जानकारी अपने देश की जनता को नहीं दे सकता, उस पर आयोग जनहित में ध्यान देवे तो बेहतर होगा देश के हिते में, 

 राजनीतिक दलों के द्वारा जारी किए गए प्रपत्रो  में पंजीयन क्रमांक का उल्लेखित नहीं होना ठीक वैसा ही है,  जैसे किसी दुकानदार ने अगर कस्टमर को बिल जारी कर दिया गया हो और उस पर जीएसटी का नंबर नहीं हो ऐसे में जीएसटी डिपार्टमेंट उस पर सीधे कार्यवाही कर सकता है,  मैं बिना नंबर का कोई वाहन भी लेकर के नहीं चल सकता आरटीओ वालों पर कार्रवाई कर सकते हैं,  पुलिस विभाग भी मुझ पर कार्रवाई कर सकता  हैं,  बिना नंबर की गन लाइसेंस में नहीं रख सकता बिना नंबर के मुझे एक सिम नहीं मिल सकती बिना नंबर के मेरा आधार परिचय नहीं है, ``तो फिर बिना नंबर का राजनीतिक दल चल कैसे रहा है``

सभी वरिष्ठ प्राधिकारियो को हमने एस सन्दर्भ में अवगत करवाया है, वोटिंग दिनाक  पूर्व इस मसले आर महत्वूर्ण सुधार की उम्मीद है, जिसमे हमने मान राष्ट्रपति जी,  मान मुख्य न्यायाधिपति सर्वोच्च न्यायालय,  मान मुख्य न्यायाधीश उच्च न्यायालय, मुख्य सचिव मध्य प्रदेश, को ईमेल माध्यम सूचित किया है, साथ ही जनहित में याचिका जल्द दायर कि जावेगी  


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