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21 Jun 2019

पुलिस के अत्याचार से पूरा देश हलाकान परेशान, अधिकारों का हो रहा दुरूपयोग, मोदी को दिखते केवल वही मामले जिनका राजनैतिक फायदा होना हो,



देश 2019 में चल रहा, स्मार्ट सिटी बनेगी 100,  IPC 159 साल पुरानी, सांसदों  के जुमलो ने हदे पार की,  

पुलिस के अत्याचार से पूरा देश हलाकान परेशान, अधिकारों का हो रहा दुरूपयोग,  मोदी को दिखते केवल वही मामले जिनका राजनैतिक फायदा होना हो,

The People Of The Whole Country Are Suffering,
 .  Tolerating, This Poor Indian Penal Code 1860 .  
  .
वर्तमान का मामला क्र 1.  दिल्ली से
दिल्ली में थाना मुखर्जी नगर में पदस्थ पुलिस वालों ने सरेराह दिनदहाड़े अपराधियों की भांति एक सरदार ऑटो ड्राइवर पर ताबड़तोड़ लाठियां बरसाई थी, घसीटा था,   इस मामले ने पूरे देश में तूल पकड़ा है,  कानून व्यवस्था पर लांछन लगना शुरू हो गए हैं,  लोगो में पहले से पुलिस को लेके अविश्वास है, जो और भी मजबूत हो रहा है,  पुलिस के ऐसे कर्मो से,  

सुप्रीम कोर्ट ने आज सक्त लहजे में दिल्ली पुलिस के पक्षधर अभिभाषक को कड़े लहजे में पूछा की कितनो पर कार्यवाही की, अभिभाषक ने कहा 3, कोर्ट ने पूछा बाकि लोगो पर कार्यवाही क्यों नही की, अभी तक लंबित क्यों है, वायरल हो रहे विडियो में, जितने भी लोग जिम्मेदार दिख रहे है, जिन जिन लोगो ने पिता के साथ माइनर पुत्र को डंडो से मारा है, उन सब पर एक सामान कार्यवाही करना नैतिक जिम्मेदारी है, माइनर ने कई मर्तबा अपने पिता को वहां से ले जाने के प्रयास किये, जिसमे लगभग मामला शांत हो चुका था, परन्तु थाना मुख़र्जी नगर  पुलिस की ओर दुर्भावना रखते हुए, तैयारी के साथ उन पर बल प्रयोग किया गया, जो पुलिस की छवी को ख़राब करता है,   आम लोगों का पुलिस पर विश्वास है,  जिसे पूरी तरह से डैमेज करने का काम दिल्ली पुलिस ने किया है,  और इस मामले में दोषी लोगों पर कार्रवाई करने में बिल्कुल भी देरी नहीं होनी चाहिए,  सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार गृह विभाग को और दिल्ली पुलिस कमिश्नर को 2 जुलाई तक पूरे मामले में जांच प्रतिवेदन शपथ पत्र के साथ प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं.

सरदारों ने मारा पुलिस को,  थाने में घुस के, वायरल हो रहा विडियो,
इस घटना में आक्रोश इतना था कि पूरे सिख समाज एकत्रित होकर के मुखर्जी थाने में पहुंचा और पुलिस वालों के साथ की मारपीट ड्यूटी चेंज हो चुकी थी जो पुलिस वाले मारपीट करके जा चुके थे उसके बदले में ड्यूटी पर तैनात दूसरे पुलिसवालों ने आक्रोश झेला

वर्तमान का मामला क्र 2.   भोपाल से ,  पुलिस ने पुलिस वाले का घर कर दिया बर्बाद
यह घटना है तारीख 19 की लगभग रात को 12:30 बजे एक एक्सयूवी महिंद्रा अचानक से गलत रास्ते पर चलते हुए पथभ्रष्ट हो जाती है, और बाजू में सही मार्ग पर चल रही एक दूसरी कार के ऊपर गिर जाती है, इस भारी वाहन में से दो युवक निकलते हैं जिसका नाम था शिवम मिश्रा और दूसरे का नाम था गोविंद शर्मा.

जिस गाड़ी के ऊपर ही है गाड़ी गिरी थी वह थी लोकेश आसवानी निवासी बैरागढ़ भोपाल की. FIR REG NO. 391/2019

इस मामले में एक्सीडेंट के दौरान 10 मिनट के अंदर शराब के नशे में कुछ पुलिस वाले पहुंचते हैं, वहां पर अफरा-तफरी का माहौल रहता है और पुलिस वाले एक्सयूवी के दोनों लोगों को बैरागढ़ थाने ले जाते हैं, u/s 279 FIR NO. 390/2019 REG.

इसमें से शिवम मिश्रा जिसकी मौत हो चुकी है, उसके पिता साइबर क्राइम पुलिस कार्यालय भोपाल में अधिकारी हैं, अभी तक थाने  में दर्ज नही हुआ है ह्त्या का प्रकरण, निलंबन की औपचारिकता संपन्न, मारपीट के 1 घंटे में मौत.  15 MNT में छोड़ने का दिया था पिता को आश्वासन, जान छुडवा दी, और शिवम् के शव को शास्स्कीय अस्पताल में धर के पीछे से भाग निकले हत्यारे, और फ़ोन आया पिता के पास हॉस्पिटल से, आपके बेटे का शव ले जाये,    

एक्सीडेंट होने के बाद थाने पर पहुंचने के बाद पुलिस वालों की छोटी मोटी बातों को लेकर हो रही कहां सुनी और कानूनी औपचारिकताएं पूरी करने के दौरान हो रही कहांसुनी पर इतना तूल पकड़ा,  कि पुलिस ने शिवम मिश्रा और गोविंद को इतना मारा कि लगभग 1 घंटे के अंदर शिव मिश्रा की मौके पर मौत हो गई,

वर्तमान का मामला क्र 3.   जबलपुर
सदर में मोंटी कार्लो शोरूम में डायल हंड्रेड और थाना कैंट के थाना प्रभारी की उपस्थिति में पुलिस ने जो उत्पात मचाया था जबलपुर शहर में उससे बड़ी घटना आज तक कहीं नहीं हो जा वह ऐसा शर्म अनी माहौल था जहां पर लोक सेवकों ने पुलिस की वर्दी में जिसमें कुछ लोग नशे में भी थे डायल हंड्रेड वाहन में बैठकर शराब पी रहे थे जिन लोगों ने सीसीटीवी कैमरे की निगरानी होते हुए भी दुकानदार पर अपराधिक रूप से बल प्रयोग किया उसके घर में घुसकर महिलाओं से अभद्रता की उसके विरुद्ध भारतीय दंड विधान की धारा 353 की कार्यवाही भी की गई जबकि उसने दुकानदार पूरी तरह साफ-सुथरा था पुलिस वालों की इस पर कार्यवाही से पूरा समाज है उठा था पीड़ित परिवार ने न्यायालय में शरण ली और वहां से आदेश पारित हुए पुलिसकर्मियों के खिलाफ प्रकरण दर्ज करने का जिसमें भारतीय दंड की अपराधिक धाराओं के तहत मुकदमा दर्ज किया गया और इस केस का आज क्या हुआ है कोई नहीं जानता सब कुछ सस्पेंस है

वर्तमान का मामला क्र 4.  जबलपुर 
पुलिस की नियुक्ति बनाई गई है,  शांति व्यवस्था बनाए रखने के लिए कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए और यहीं पर एक नमूना देखा था पुलिस का लोड गंज थाना और गोहलपुर थाना का जिसमे पकडे गए जुआरी और सटोरियों ने जो दस्तावेज खोले उन दस्तावेजों में 23 पुलिसकर्मियों के नंबर नाम और उनसे हो रही लेनिन का हिसाब किताब मिला अक्सर पुलिस थानों में अपराध दर्ज होते हैं जिसमें लिखा जाता है कि मैं आरक्षक खिलाने रास्ते से जा रहा था मुझे मुखबिर की सूचना मिली और मैंने देखा कि सामने वाले चौक पर पान वाले की दुकान के बाजू में एक व्यक्ति नीले पीले कपड़े पहन कर खड़ा है जिसके पास एक बोरी है मैं यह पूछे जाने पर वह भागने लगा और मैंने उसे पकड़ा उसमें गांजा निकला उसमें शराब निकली तथा अलग-अलग प्रकार के मादक पदार्थों का उल्लेख कर एक अपराध किया जाता है और चालान पेश किया जाता है न्यायालय में अर्जित करने के लिए इस तरीके से जाते हैं जिनको न्यायालय से लगभग 2 वर्ष के अंतराल में करते हुए सीधे साधे व्यक्ति को दोषमुक्त कर दिया जाता है उसका चेहरा अभी तक बहुत कम लोग जानते हैं

वर्तमान का मामला क्र 5.  जबलपुर
एक मामला हुआ था थाना अंतर्गत ओंमती जबलपुर में जहां पर पुलिस ने सिविक सेंटर से स्वप्निल नाम के एक व्यक्ति को फर्स्ट किया और उसे न्यायालय में प्रस्तुत किया जब पुलिस ने न्यायालय में इस व्यक्ति को प्रस्तुत किया तब उसके अधिवक्ता की ओर से जमानत अर्जी प्रस्तुत करते हुए उसका मुलाहिजा कराने की रिक्वेस्ट की न्यायालय ने स्वीकार किया और उस व्यक्ति का मुलाहिजा नेताजी सुभाष चंद्र बोस मेडिकल कॉलेज से कराया गया जबकि इस व्यक्ति का मूलांक तारीख के दौरान विक्टोरिया हॉस्पिटल से कराया जा चुका था दोनों में फर्क है कि नेताजी सुभाष चंद्र बोस मेडिकल कॉलेज से रिपोर्ट आई थी उसके आधार पर विक्टोरिया के चिकित्सक और ऑफिसर के विरुद्ध न्यायालय ने अपराध के आदेश दे दिए पुलिस ने अपने अधीन जांच अनुसंधान में रहे स्वप्निल के साथ ऐसा व्यवहार किया था उसके शरीर को इतनी चोटें प्रदान की गई थी शिद्दत से उसके जखम चिल्लाकर बोल रहे थे मुझे शर्म आती है कि मैं भारतीय हूं और मुझे शर्म आती है कि ऐसी सुरक्षा कवच खाकी रंग का समाज को पहनाया गया है जो केवल उसका शोषण करता है लिहाजा कोर्ट ने दोनों के विरुद्ध प्रकरण दर्ज कर कार्रवाई आर की कॉपी पेश करने के आदेश दिए

वर्तमान का मामला क्र 6.  भोपाल
यह मामला था भोपाल निर्भया कांड के तर्ज पर इस पर एमपी नगर पुलिस थाने ने अपनी हैवानियत का सबूत दिया था,  पटरी पर एक अचेत पड़ी युवती जिसका बलात्कार किया गया था और उसे वहां पर फेंक दिया गया था घायल युवती को पुलिस ने थाने तो नहीं ले कर गए परंतु उसको दूसरी पटरी के पार फेंक दिया गया था, ताकि एक थाने के बाहर का मामला हो जाए,  एफ आई आर दर्ज करने और कार्रवाई करने की जद्दोजहद से जुर्म में  सीएसपी सहित दो थाना प्रभारियों को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया और उसके बाद दोनों का टर्मिनेशन भी हुआ परंतु यहां पर किसी प्रकार का सुधार नहीं होता है,  इस प्रकार की विसंगतियां पुलिस विभाग में लगातार जारी रहती हैं और जनता के शोषण का, क्रियाकर्म का कार्यक्रम हमेशा से चालू रहता है, पुलिस अधिकारियों दिए गए अधिकारों के दुरुपयोग की पराकाष्ठा है ये,  

वर्तमान का मामला क्र 7.   जबलपुर  
फरवरी 2019 की कहानी है एक युवती  थाने में शोषण की रिपोर्ट लिखाने पहुंचती है अपनी पीड़ा सुनाती है और वहां पर बैठे ड्यूटी अफसर के साथ दो लोग पहले ही खुश मिजाज अंदाज में उसका मजाक उड़ाते हैं उसके साथ बदतमीजी करते हैं और उसके साथ हुए हादसे पर व्यंग करते हैं  प्रकरण में एसपी से गुहार लगने पर दो लोगों को सस्पेंड किया गया था परंतु सस्पेंशन के बाद की कार्यवाही पर पुलिस कान्फ्रेंस कभी भी नहीं होती है,  कोई जानकारी जनता को पुलिस के वरिष्ठ अधिकारी के द्वारा कभी भी नहीं दी जाती है,

यह सभी घटनाक्रम बताते हैं कि अंग्रेज तो चले गए परंतु पुलिस वाले यहां पर छोड़कर करें उनकी जगह पर उनकी तरफ से अत्याचार करने का पूरा अधिकार उन्होंने भारतीय दंड विधान में मेंशन करके रखा है जो 1860 का बना हुआ था,  जिल्लत भरी जिंदगी जीने के लिए मजबूर करता है भारतीय दंड विधान पूरे देश को मजबूर करता है,

राष्ट्र हित की कसम किसी ने भी खाए हो, ये प्रथा मात्र है, जेसे अभी के सांसदों ने ली, देश हित में काम करने की शपथ जो वही भूल जायेंगे, वैसे ही किसी ने ड्यूटी ज्वाइन करने से पहले कोई शपथ ली है तो  उसी दिन के लिये ली थी बस,  कहीं दूर दराज से ट्रांसफर होय और किसी शहर में आकर प्रभार मिलता है किसी अधिकारी को उसके लिए सामाजिक प्रतिष्ठा बहुत महत्वपूर्ण विषय नहीं होती है, और अधिकार उसके पास भरमार होते हैं प्लस साथ में वे वैधानिक सुरक्षा में भी होते हैं उसको अपनी सुरक्षा के लिए हथियार भी मिलते हैं उसको दूसरों पर कार्यवाही करने के लिए स्टाफ भी मिलता है उसके विरुद्ध कभी कार्यवाही भी नहीं होती है क्योंकि राष्ट्र हित के लिए ड्यूटी पर रहकर काम करने की एक लाइन उसकी सारी विभागीय जांच को खत्म कर देता है और वरिष्ठ जांच अधिकारी कभी छोटा रहा होगा, जिससे गलतियां भी होती हैं भले वह आवेश में हो गई हो जैसे दिल्ली पुलिस से हो गई चाहे , भोपाल वालों से हो गई,  चाहे  जबलपुर वालों से हो गई,  बस गलती माफ उसकी नहीं होती है,,  जो पुलिस विभाग में नौकरी नहीं कर रहा होता है, बाकी तो किसी की खैर नहीं कोई सुरक्षित नहीं, सबसे सब कुछ लेने  अधिकार पुलिस के पास है, वह आपके साथ जब जैसा चाहे सुलूक कर सकती है, और इसकी फिकर किसी भी सांसद को नहीं है, किसी भी विधायक को नहीं है, यह जनप्रतिनिधि जो जनता का भला करने का आश्वासन चुनाव से पहले देते हैं बरसाती मेंढक के जैसे चुनाव खत्म होते ही लुप्त हो जाते हैं, और लौटकर मोहल्ले की गलियों में 5 साल तक नहीं देखते हैं,.

केस बनते है, अपीले लगती है लोग बरी हो जाते है, थाने की ऑडिट नही होती,  सारे काम हवा में चल रहे है, पर फिलहाल जेल हो ही आते है, जांच एक गोल्डन वर्ड है, जब चाहो तब इस्तेमाल करो जैसे चाहो वैसे इस्तेमाल करो, जहा चाहो वह मोड़ लो, जब चाहो वह रोक लो, जैसी चाहो वैसी बना दो रिपोर्ट, बाद में फिर से जांच हो जाएगी, बस कोर्ट कोर्ट खेल चलेगा 


















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