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21 Nov 2019

सेक्स रैकेट चलाने वालों की जमानत अर्जी खारिज

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सेक्स रैकेट चलाने वालों की जमानत अर्जी खारिज

दिनांक 24 अक्टूबर 2019 को थाना विजय नगर आरक्षी केंद्र जबलपुर के द्वारा मुस्कान प्लाजा फ्लैट में छापामार कार्यवाही की गई थी जहां पर कार्यवाही के दौरान अभियुक्त नाज़नीम और इम्तियाज  व एक लड़का संदिग्ध हालत में पाए गए, मौके पर जब्ती कामसूत्र से संबंधित वस्तुओं की हुई थी,  तथा फ्लैट  को किराए पर लिए जाने के मामले में फर्जी आधार कार्ड का उपयोग किया गया था,  जो युवक पकड़ा गया है वह दिल्ली का रहने वाला है

माननीय न्यायालय के समक्ष दूसरा जमानत आवेदन पत्र प्रस्तुत किया गया था जो चेंज आफ सरकमस्टेंसस के आधार पर किया गया था उक्त परिधि में चल रही विवेचना अंतर्गत मामले को लोक अभियोजक के द्वारा मौखिक विरोध प्रस्तुत किया गया तथा अभियुक्त गणों की ओर से अभिभाषक के द्वारा जो तर्क दिए गए थे उन्हें माननीय न्यायालय के द्वारा बतौर सुनवाई का अवसर प्रदान करते हुए, साथ ही समस्त विधिक नियमों को तथा प्रकरण  की वर्तमान परिस्थिति  को दृष्टिगत रखते हुए, अभियुक्तों   का जमानत आवेदन पत्र निरस्त कर दिया गया,

पुलिस के द्वारा इस मामले में अनैतिक व्यापार अधिनियम की समस्त धाराओं के तहत तथा भारतीय दंड विधान की धारा 420 467 468  471 के तहत प्रकरण दर्ज कर विवेचना में लिया गया था उक्त गैर जमानती अपराध पर विवेचना भी लंबित है,

इस तरह के मामलों में पहली प्राथमिकता पुलिस को प्राप्त होती है जांच प्रभावित न हो, साक्ष्य प्रभावित ना हो, इसका उल्लेख कर पुलिस के द्वारा विरोध पत्र प्रस्तुत किया जाता है, जिसमें माननीय न्यायालय को जांच अधिकारी के पक्ष में, बनाए गए आरोपियों का आवेदन पत्र जमानत हेतु निरस्त करना मजबूरी होती है,

परंतु पुलिस के द्वारा की जा रही जांच, कितनी सच है, कितनी निष्पक्ष-विधिक है, इस तथ्य का खुलासा प्रकरण की पूर्ण विवेचना प्रकरण चालान के परीक्षण के उपरांत ही निर्धारित किया जाता है, उसके पहले हमारे भारत देश के आम नागरिक को अपने आप को बेगुनाह साबित करने के लिए, जिस कठिनाई के दौर से गुजरना पड़ता है, उसका सिस्टम तो सिर्फ यही है, की फ़िलहाल जेल की यात्रा को एक तीर्थ यात्रा के रूप में न सही, पुराने जन्मो के प्रायश्चित के रूप में भोगे, ठोस आधार भी साक्ष्य  की विषय वास्तु के रूप में कंसीडर नही होते, जमानत के लिए उन्हें पर्याप्त आधार माना जाना न्यायायिक बाध्यता नही होती,  अंत में आप बरी भी हो गए, तो उसका कोई ठोस आधार नही होगा, सिर्फ होगा तो  संदेह से परे, एक आधार,  


Reports : Siraj khan 

Compiled By  : Jitaindra Makhieja 

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