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8 Jul 2017

गौहत्या के नाम दरिंदगी में खुली छूट और गौमांस GST में कर छूट! संयोग या.......

जिस दौर में गौरक्षा के नाम पर इंसान दरिंदगी पर उतर आया है , यह आग किसने लगाई है,यह सब जानते हैं । ऐसे में केंद्र सरकार गौमांस के विक्रय को हतोत्साहित करने के बजाय उसे करमुक्त कर रही है । यह हाल ही में जारी भारत सरकार के राजपत्र से साबित होता है।
           भारत सरकार ने जीएसटी में कर के दायरे से जिन वस्तुओं या अन्य को बाहर रखा गया है उसमें गौवंश और गौमांस विक्रय को भी सम्मिलित किया गया है । इसमें एक बार नही चार बार गोकुलीय प्राणी शब्द का उपयोग किया गया है। जिसमे एक बार जीवित गाय और दो बार गौमांस  और एक बार मृत गौवंश के शारीरिक अवशेषों का उल्लेख किया गया है।
           जब देश के अधिकांश क्षेत्र में बूचड़खाने और बीफ़ के ख़िलाफ़ सरकारी अभियान जारी और गौरक्षक हिंसा पर उतारू है जो महज़ शक के आधार पर कई इंसानों की जान ले चुके हैं और कइयो को लहूलुहान कर चुके हैं । ऐसे में गौमांस के विक्रय को हतोत्साहित करने के बजाय उसे कर मुक्त करना अनेकों प्रश्न को जन्म देता है।
         गौवंश ही नही सुअर और गधे के मांस को भी कर मुक्त रखा गया है। प्रदूषित मांस के नाम पर सरकारें बूचड़खाने बंद कर रही हैं और सुअर जैसे प्राणी के घातक मांस के विक्रय को भी कर मुक्त कर प्रोत्साहित किया जा रहा है। आम ज़रूरतों की कई वस्तुओं पर कर का भार पड़ेगा लेकिन इन वस्तुओं के प्रोत्साहन के पीछे सरकार  आदेश विवादों को जन्म देता है।
         असाधारण राजपत्र में विभिन्न प्राणियों के मांस का उल्लेख है कहीं ताज़ा और कई स्थान पर हिमशीतित याने फ्रिज़ आदि में ठंडा किये गये मांस का ज़िक्र है। जब भोजन में प्रयुक्त सभी प्राणियों का मांस कर मुक्त है तो सबके नामो का उल्लेख औचित्यहीन है फिर भी ऐसा क्यों किया गया शायद ही सरकार के पास इसका उचित उत्तर हो ।
        सरकार का यह ताज़ा राजपत्र उन लोगों के लिये भी सबक है जो कौवा कान ले गया के आधार पर हिंसा पर उतारू हैं । 

रिज़वान अहमद सिद्दीक़ी
एडीटर इन चीफ़ 
न्यूज़ वर्ल्ड चैनल

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