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2 Sep 2017

फर्नीचर माल में लगी आग शक के दायरे में


फर्नीचर माल अधारताल जबलपुर में लगी आग के पीछे कुछ अनसुलझी कहानिया. दिनाक 02-09-2017 को भरी दोपहर में मौजूद स्टाफ की उपस्तिथि में आग लग जाना GST विभाग - वाणिज्यिक कर विभाग, और बीमा कंपनी के लिए एक बड़ी चुनौती है, हाल में चालू होने वाली  प्रणाली से व्यापारियों को उतना फरक नही पड़ा जितना की निर्माणकर्ताओं के लिए तकलीफ दायक रहा है, यह सत्य है की ट्रेडर व्यापारी द्वारा वित्तीय संव्यवहारो को अजागरूकतावश नही कर पाने का फायदा निर्माणकर्ता  व्यवसायी उठाता है इस प्रकार निर्माणकर्ता व्यापारी ट्रेडर्स व्यापारियों से पूरा कर वसूल तो लेता है पर सरकारी खजाने में जमा नही करता है. इसी से सम्बंधित एक विषय में खंडेलवाल फर्नीचर में लगी आग का है, यह फर्म कई दशक पुरानी है, किसी प्रकार से फर्नीचर की दुनिया में कुछ भी निर्माण करना हो सभी प्रकार से साधनों से सम्पन्न है, हाल में लगी आग के पीछे कुछ अनसुलझे सवाल है जिनके जवाब की अपेक्षा हमे भी है और बीमा कंपनी-वाणिज्यिक कर विभाग व् जी एस टी विभाग  को भी, 

खंडेलवाल फर्नीचर का 31-03-2017 का  अंतिम स्टॉक कितने परसेंट वाला कितने का था. कितने परसेंट का इनपुट लेना शेष था, मध्य प्रदेश के भीतर व् अंदर से क्रय किये गए माल की सूची अनुसार आगत कर दावा कुल कितने का था, फर्म के द्वारा काटे गए बिल और उनमे प्राप्त किये गए भुगतान बैंक के माध्यम से है ? विक्रय कितने बिना बिल के किये गए जो जलने के पहले बिक गए इसकी जांच शेष है, 

क्या यह अंतिम स्टॉक बीमा कंपनी में दर्शाए गए आकड़ो से मेल खता है, क्या फर्म के द्वारा प्राप्त किया गया आगत कर सरकारी खजाने में जमा हो पायेगा, फर्म के द्वारा मेंटेन किये जा रहे अकाउंट अभिलेखो का रिकॉर्ड परिशीलन उपरान्त यह तथ्य सामने आने की संभावना है साथ ही वर्तमान स्तिथि अनुसार जले हुए माल का  डीएनए ही यहाँ बता पायेगा की जलने वाला माल क्या था और कितना था, वास्तव में फॉरेंसिक जांच से यह तथ्य उजागर हो पायेंगे. अभी तक की जानकारी अनुसार इतनी बड़ी बिल्डिंग को सुरक्षा साधनों से लेस नही किया गया था, जिस पर नगर निगम की और से कार्यवाही होना शेष है, जिस प्रकार से आग को धधकते हुए कैमरे में कैद किया गया है, किसी प्रकार से यह प्रतीत नही होता की जलने वाला माल सिर्फ वो ही था जो की रिकॉर्ड में बतौर स्टॉक पंजीकृत है. 

किस माल के कितने नग, किस क्वालिटी के कितने नग जले है इसकी जानकारी इकट्ठी करना शेष है. इस प्रकरण में आगत कर दावे को एक तरफ़ा फर्म के हित में मुनाफा डाइवर्ट करने का एक असफल प्रयास भी हो सकता है इस प्रकरण में किसी प्रकार से योजनाबद्ध तरीके से लगाये गयी आग होने की संभावनाओ को नाकारा नही जा सकता.साथ ही यह माल रिजेक्टेड, स्क्रैप, कचरा भी हो सकता है आँखों  देखी लापरवाही इतनी विशाल  धधकती आग में तब्दील हो गयी.  आग बुझाने हेतु फिर्मं मालिक द्वारा पूरी बिल्डिंग में कुल कितने अग्निशमक यंत्र लगाये गए थे आग के दौरान  कितने उपयोग किये गए, उनके द्वारा आग को बुझाने में प्रयास क्या किया गया, अधिष्ठापित संयंत्रो का उपयोग हो भी पाया की नही, यह सभी रहस्य है जो वैट-GST  के एडजस्टमेंट को हवा देते है. यह सभी जानकारिया न्यूज़ विजन को फर्म मालिक की और से अपेक्षित है न्यूज़ विजन की ओर फर्म के मालिक से जानकारी प्राप्त करने हेतु कई मर्तबा मिलने का प्रयास किया गया वे नही मिले , इस विषय में उनके मेनेजर द्वारा कोई जानकारी देने से मना कर दिया. न्यूज़ विजन द्वारा इस विषय में GSTt-वाणिज्यिक कर विभाग से जानकारी प्राप्त करने हेतु सूचना अधिकार २००5 6(1) के तहत आवेदन दायर का जानकारी मांगी गयी है जिनको फिर फर्म के द्वारा भरी गयी ऑनलाइन विवरणी से व् बीमा कंपनी में दी गयी स्टॉक की जानकारी से तथा ऑडिट रिपोर्ट से स्पष्टीकरण हेतु मिलान किया जायेगा ;-      

जितेन्द्र मखीजा
Assit. Editor
News Vision India



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