फर्जी दस्तावेजो पर जमीन हथियाना महंगा पड़ गया, पटेल बंधुओ को, जबलपुर - News Vision India

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17 Oct 2017

फर्जी दस्तावेजो पर जमीन हथियाना महंगा पड़ गया, पटेल बंधुओ को, जबलपुर


 फर्जी दस्तावेजो पर जमीन हथियाना महंगा पड़ गया, पटेल बंधुओ को, जबलपुर

जबलपुर के पोलीपाथर में अनायास ही एक जमीन पर मालिकाने का हक़ जताते हुए सुधीर पटेल और रोहित पटेल के द्वारा जमीन पर बोर्ड लगाया गया, लिखा था, हस्तक्षेप करने पर कानूनी कार्यवाही की जाएगी.

पटेल बंधुओं ने एक फर्जी वसीयत यार की वसीयत कई दशकों पुरानी थी मगर तैयार करते वक्त उन्होंने इस बात का ध्यान नहीं दिया जिस तारीख की वह वसीयत याद कर रहे थे उस तारीख का खजराना डालकर नया खसरा नंबर है 9 ने डाला और न्यायालय को गुमराह करते हुए इन्होंने उस पर केस लगाकर डिग्री भी हासिल करना जब असल मालिक को पता चला तो उसने न्यायालय के इस फैसले को चुनौती दी और न्यायालय ने इनके दस्तावेजों को सही पाते हुए पटेल बंधुओं की रजिस्ट्री और डिग्री दोनों कैंसिल कर दो उसके बाद पटेल बंधुओं पर धोखाधड़ी और फर्जी दस्तावेज तैयार करने का मामला जिसकी की उच्च न्यायालय में जमानत खारिज कर दी.

ये कोई पहला फर्ज़ीवाड़ा नहीं है, RDVV में कार्यरत डॉ रावत की जमीन का दोनों पटेल बंधुओ के द्वारा जॉइंट प्रणाली में विकसित करने हेतु करार किया गया, फिर धीरे से जबलपुर में टुकडो में कई लोगो से इकरार नाम पर रकम प्राप्त कर ली गयी.

और प्रकरण में आया नया मोड़, कई सृजित फर्जी दस्तावेज को सृजन कर दोनों पटेल बंधुओ द्वारा अलग अलग प्रकार से सभी नियमो को ताक पर रखते हुए महज रकम प्राप्ति हेतु कई इकरारनामे निष्पादित किये जो जांच में प्रकट हुए, और पूरी कानूनी कार्यवाही का शिकार खुद हो चले

भारतीय दंड विधान की कई अपराधिक धाराओ के तहत दर्ज मामलो में फरार पटेल बंधुओ के द्वारा उच्च न्याय ले में अग्रिम जमानत  हेतु दायर आवेदन को वापस ले लिया गया, इस प्रकरण की जांच पूरी हो कर न्यायालय में अभियोग पत्र प्रस्तुत किया जाने की समय सीमा उत्तीर्ण हो चुकी है, दंड प्रक्रिया स. 439 के तहत आवेदको के द्वारा आवेदन दायर करने हेतु उच्च नयायालय से  स्वेच्छारिता के आधार पर 438 के तहत दायर  आवेदन को वापस लिया गया,

धोखा खाए अन्य कई लोगो के द्वारा इस प्रकरण से पृथक हो कर शिकायत विषय समबधित अधिकारी / थाने में रकम वापसी हेतु दर्ज करना शेष है, फिलहाल डॉ रावत को मालिक रहते इस जमीन को बेचने हेतु राहत नही मिल पा रही है,  अब इस प्रकरण में दिखेगा रेरा के तहत कार्यवाही होना जनहित में अत्यंत आवश्यक है,

हाल ही में केंद्र सरकार द्वारा फर्जी बिल्डर और कलोंनाईजरो के विरुद्ध रेरा एक्ट लागू  किया गया है, अब भविष्य में इस तरह की धोखेबाजी का शिकार कोई खरीददार नही होगा, परंतु अब असल जमीन मालिको को डेवलपर के चक्कर में फसने से बेहतर है, रेरा के सभी नियमो ध्यान में रख कर किसी भी विकास करता /  कलोंनाईजरो के साथ जॉइंट प्रणाली में करार करे , ताकी फ्रंट में रह कर रकम प्राप्त कर संपत्ति को उलझाने वाले कलोंनाईजरो के चंगुल में कोई असल जमीन मालिक न फसे.

EDITOR IN CHIRF ;- DR. SIRAJ KHAN






ASSTT EDITOR ;- JITAINDRA MAKHIEJA  

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