मजदूरों के दम पर उद्योगपतियों के चल रहे है कारोबार लेकिन कम देते है पगार तभी तो मजदूर हैं कंगाल और ये है मालामाल - News Vision India

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17 Feb 2018

मजदूरों के दम पर उद्योगपतियों के चल रहे है कारोबार लेकिन कम देते है पगार तभी तो मजदूर हैं कंगाल और ये है मालामाल


                                              मजदूरों के दम पर  उद्योगपतियों के चल रहे है कारोबार लेकिन कम देते है पगार तभी तो मजदूर हैं कंगाल और ये है मालामाल 


जी हां ये एक कटु सत्य है कि मजदूरों के दम पर ही उद्योगपति कर रहे हैं कारोबार लेकिन इनको कम देते हैं पगार यदि कर दें ये हड़ताल तो ठप्प हो जायेंगे इनके कारोबार /- हम बात कर रहे है उन मजदूरों की जो दिनरात जीतोड़ मेहनत करते हुऐ पूजीपतियों के कारोबार को बड़ा रहे है लेकिन पगार के नाम पर इनको चन्द रुपये ही मिल पाते है यदि देश के सभी मजदूर मिलकर हड़ताल कर दें तो इन पूजीपतियों के चलने वाले कारोबार ठप हो जायेंगे और ये कंगाल हो जायेंगे लेकिन ऐसा करना भी तो असम्भव है क्योंकि यदि मजदूर हड़ताल कर भी दें तो वह भी भूखों मरने के कगार पर पहुंच जायेंगे इसलिए तो यह कम पगार मिलने पर भी दिन रात जी;तोड़ मेहनत करने के लिए मजबूर हैं और हों भी क्यों न आखिर पापी पेट का सवाल है और इसी बात का यह पूंजीपति इन मजदूरों का जमकर शोषण कर रहे है यदि हम बात करें चूड़ियाँ के लिये मशहूर राजिस्थान के सांगानेर की जिसने आजकल फिरोजाबाद को जो कभी चूड़ियां बनाने के लिए मशहूर था लेकिन समय के साथ साथ सब कुछ बदलाव हो गया है और अब जयपुर में चूड़ियों का कारोबार कितना फल फूल रहा है कि राजिस्थान  ही नहीं बल्कि अन्य प्रदेशों में भी जयपुर के कड़े व चूड़ियाँ अपनी एक अलग पहिचान बना चुके हैं जो महिलाओं के दिलोदिमाग पर छा गए हैं इसलिए इनके  रेट भी आसमान छूते हुए नजर आ रहे है इस सम्बन्ध में जब हमारे बरिष्ठ पत्रकार रामखिलाड़ी शर्मा ने  एक ऐसे मजदूर से बात की तो एक चोकाने वाला सच सामने आया जो 15 घण्टे तक लगातार अपनी ड्यूटी को बखूबी अंजाम दे रहे हैं लेकिन उनको पगार मिलती है सिर्फ नाम मात्र की उसके पश्चात भी यह कार्य कर रहे है क्योंकि उन्हें पता है कि सरकार चाहे कोई भी दल की आये लेकिन इनका होता हुआ नजर नहीं आ रहा है इनकी रोजीरोटी चलती है तो इन्हीं के बलबूते?   जब उस मजदूर ने अपनी आपबीती सुनाई व जीवन में घटने वाली घटनाओं को भी उजाकर करते हुऐ बताया कि किस तरह से वह भयंकर गर्मी  जिसमें कि लोग धूप में भी बैठने का साहस नहींजुटा पा रहे हो उस समय यह लोग आग के सहारे भरपूर 15 घटों तक बैठ कर  भरपूर मेहनत करते हैं लेकिन पगार मिलती हैं तो प्रतिदिन मात्र 500₹ से 700₹ तक  लेकिन इनके द्वारा बनाई गई चूड़ियाँ बिकती है हजारो की कीमत में जिससे अमीर और अमीर व गरीब और भी गरीब होते  जा रहे है क्या सरकार ने कभी इन मजदूरों के दर्द को सुना है? और क्या गरीब मजदूरों की तरफ यह ध्यान देंगे? यह भी एक चिंतनीय बिषय हैं जिस पर ध्यान देने की अति आवश्यकता है /- रामखिलाड़ी शर्मा ब्यूरो चीफ अलीगढ़ की खास कवरेज जयपुर से  /-

 रिपोर्ट-रामखिलाड़ी शर्मा(ब्यूरो चीफ)-खैर-अलीगढ़-उप्र-मोबाइल-# 8273099556 & # 8979221676 #              वाइट- मोनू उर्फ़ मोहिद्दीन( चूड़ा व चूड़ियों के जन्मदाता )                        विजुअल- चूड़ा व चूड़ियाँ बनाते हुये कारीगरों के

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