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2 Aug 2018

व्यापारियों को पुलिस ने पीटा, नहीं हो रही F I R

दो व्यापारियों के आपसी लेनदेन के मामले में एक व्यापारी ने पुलिस के दो आरक्षकों को व्यक्तिगत रूप से फोन लगाकर मौके पर बुलवाया और व्यापारी पर कार्यवाही करने की भूमिका का निर्माण किया और व्यापारी को दुकान से घसीटते हुए जूतों से मारते हुए पुलिस की गाड़ी में बैठाया गया यह दोनों आरक्षक पुलिस की वर्दी में नहीं थे स्थानीय लोगों के अनुसार प्राप्त जानकारी, जानकारी ऐसी भी प्राप्त हो रही है कि दोनों आरक्षक पहले से ही किसी मामले में लाइन अटेच चल रहे हैं जो फिलहाल ड्यूटी पर नहीं थे पुलिस की बर्बरता पर व्यापारी समाज आक्रोशित है और थाने का घेराव कर FIR की मांग की जा रही है जहां पर किसी प्रकार की कोई कार्यवाही नहीं होने के चलते पूरा व्यापारी समाज थाने में ठहरा हुआ है और कार्यवाही का इंतजार कर रहा है

 दो अलग-अलग वीडियो सामने आए हैं जिसमें पीड़ित आवेदक प्राथमिकी दर्ज करने हेतु निवेदन करते हुए परेशान हो गया और उसने अपने ऊपर मिट्टी का तेल डाल दिया और अपने आप को जिंदा जलाने का प्रयास किया जिसे पुलिस ने मौके पर रोका व्यापारियों की समझाइश पर कानूनी कार्यवाही के लिए सब लोग अग्रसर हुए परंतु अभी तक ढीली ढाली कानून व्यवस्था के चलते FIR दर्ज नहीं हो सकी है 

आश्वासन पर आश्वासन व्यापारियों को दिया जा रहा है पुलिस के द्वारा टालमटोल की जा रही है और पुलिस के वर्तमान ड्यूटी पर तैनात अधिकारी जो साथ वीडियो में दिख रहे हैं जो पुलिस वालों का बचाव करते हुए बोल रहे हैं कि किसी प्रकार की कोई मारपीट नहीं हुई है आक्रोशित गलगला व्यापारी संघ ने कार्यवाही नहीं होने की दशा में जबलपुर बंद का ऐलान किया है अगर पुलिस के द्वारा किसी प्रकार की कोई वैधानिक कार्यवाही नहीं की जाती है समाधानकारक रिप्लाई अगर व्यापारियों को नहीं दिया जाता है तो ऐसी स्थिति में व्यापारी संघ पुलिस प्रशासन के विरुद्ध आक्रोश रूपी हड़ताल करने को मजबूर है

 FIR दर्ज करने के लिए कौन-कौन सी व्यवस्थाएं उपलब्ध हैं
सर्वोच्च न्यायालय ने इस विषय पर एक व्यवस्था का मजाक बनाने वाले पुलिस अधिकारियों पर लगाम लगाने के लिए लतिका वर्सेस स्टेट ऑफ हिमाचल प्रदेश का आदेश पारित कर निर्देशित किया है कि तत्काल प्रभाव से fir दर्ज की जाए

 मुख्य सचिव मध्यप्रदेश के द्वारा भी जन शिकायत निवारण विभाग का गठन किया जा कर जन शिकायतों के त्वरित निराकरण हेतु अधिसूचना जारी की गई हैं 

स्वयं मुख्यमंत्री ने CM हेल्पलाइन का उद्घाटन किया है ताकि जनता को न्याय मिल सके

इन सब से परे पुलिस प्रशासन ने एक नया आयाम हासिल किया है बहुचर्चित विवाद मोंटी कार्लो सदर में भी पुलिस की बर्बर कार्यवाही पुलिस प्रशासन की नाक कटाने के लिए नाकाफी साबित हुई थी एक मामला मिलता-जुलता और थाना omti में आया है बड़ी मुश्किल से न्यायालय के आदेश के बाद पुलिस प्रशासन ने अपने ही लापरवाह पुलिस अधिकारियों के विरुद्ध थाना सदर में FIR दर्ज की थी, अब इस मामले में पुलिस का क्या रुख रहता है देखते हैं

थाने में गिड़गिड़ाते हुए मिला   करदाता/TAXPAYER

 आक्रोशित व्यापारियों ने पुलिस पर आरोप लगाए कि हम व्यापारी अपना सौहार्दपूर्वक व्यापार करते हैं और Tax  का पूरा भुगतान करते हैं बावजूद उसके किसी प्रकार की कोई सुरक्षा हमें प्राप्त नहीं हो रही है उल्टा सुरक्षा के लिए नियुक्त अधिकारी ही उन पर अत्याचार कर रहे हैं ऐसा लगा जैसे अंग्रेजों का जमाना फिर से याद आ गया हो

इस प्रकरण के मुख्य पहलू पहला यह है कि
पीड़ित पक्ष ने बताया है कि बिना किसी शिकायत और बिना किसी FIR के बिना किसी जांच के पीड़ित पक्ष को अपमानजनक माहौल बनाकर मार्केट के बीचों पुलिस की गाड़ी में ले जाकर बिठाया  और मारते हुए थाने ले गए  और पुलिस थाने में भी मारपीट की गई

 दूसरा पहलू 
यह है कि पुलिस मेडिकल परीक्षण के नाम पर और जांच के नाम पर प्रकरण कायम करने में ढिलाई जानबूझकर बरत रही है इस प्रकरण में हो चुकी कारवाही से यह स्पष्ट होता है कि पुलिस के द्वारा की जा चुकी कार्यवाहियों पर पूरी तरह से भरोसा किया जाना संभव नहीं है हर कार्यवाही पुलिस के द्वारा पूरी जांच पड़ताल के साथ की जाती रही है कानून व्यवस्था बनाए रखने के नाम पर किसी प्रकार की कोई लापरवाही या मनमानी नहीं होती है ऐसा सोचना और पुलिस पर भरोसा करना है फिलहाल संभव नहीं है

पुलिस थाने में उपस्थित हो चुके आवेदक पीड़ित पक्ष के समर्थकों पर बल प्रयोग करने की पूरी व्यवस्था कर ली है परंतु घटना से संबंधित एक FIR करने में घंटों लगा दिए है



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