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8 Dec 2018

लोक अदालत भोपाल, विधिक सेवा प्राधिकरण भोपाल ने रचा नया इतिहास, 1423 प्रकरण निपटाए

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लोक अदालत भोपाल,  विधिक सेवा प्राधिकरण भोपाल ने रचा नया इतिहास,  1423 प्रकरण निपटाए

राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण ``नई दिल्ली`` के निर्देश अनुसार तथा माननीय न्यायमूर्ति उच्च न्यायालय श्रीमान S.K. सेठ के मार्गदर्शन में तथा मध्य प्रदेश राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण के सदस्य सचिव के निर्देशन में भोपाल विधिक सेवा प्राधिकरण जिला न्यायालय भोपाल के सचिव श्रीमान माननीय आशुतोष मिश्र के अथक प्रयासों के साथ जिला एवं सत्र न्यायालय भोपाल में लंबित लगभग 8254 प्रकरणों को आज 8 दिसंबर 2018 को आयोजित की गई लोक अदालत में निराकरण हेतु चिन्हित किया गया था

 जिसमें भोपाल न्यायालय के समस्त जिला एवं सत्र न्यायाधीशों के अथक प्रयासों से लगभग 1450 प्रकरणों का स्थाई निराकरण आज लोक अदालत में भावी रूप से कर दिया गया.

भोपाल विधिक सेवा प्राधिकरण के सचिव श्रीमान आशुतोष मिश्र जी के अनुसार आज लोक अदालत में 909 सिविल और दाण्डिक  प्रकरणों का निराकरण किया गया, 514 मुकदमे प्री-लिटिगेशन से संबंधित रहे, इस प्रकार कुल 1423 प्रकरणों का स्थाई निराकरण आज के लोक अदालत में,  जो इस वर्ष की अंतिम लोक अदालत थी, में किया गया,  इन सभी प्रकरणों में जिसमें की कुल राशि लगभग 24 करोड़ रुपए बतौर अवॉर्ड राशि पारित की गई, जिसमें मुआवजे से संबंधित समझौते से संबंधित प्रकरण मुख्य रूप से रहे .

भोपाल विधिक सेवा प्राधिकरण के सचिव श्रीमान न्यायाधीश आशुतोष मिश्र जी,  के अनुसार राज्य के लोक अदालत के आयोजन में दीवानी मुकदमे,  परिवारिक विवाद,  चेक बाउंस , प्री लिटिगेशन,  लोक सेवा संबंधी विवाद  नगर निगम संबंधित विवाद   मोटर दुर्घटना संबंधित विभाग,  विद्युत अधिनियम और जलकर जैसे तथा शमनीय अपराध तथा समझौते के योग्य सभी प्रकरणों को चिन्हित किया जाकर लोक अदालत में निराकरण के लिए पंजीबद्ध किया गया था,  जिसमें लगभग 1423 प्रकरणों का आपसी समझौते पर तथा लोक अदालत के अवसर पर दोनों पक्षों के राजीनामा के आधार पर तथा काफी लंबे समय से लंबित मुकदमों में दोनों पक्षों के आपसी सहमति के आधार पर इन सभी मुकदमों का स्थाई निराकरण हुआ,  जिसमें कुल राशि लगभग 24 करोड़ों रुपए बतौर अवार्ड पारित की गई,  इसमें लगभग 2200 लोगों को लाभ प्राप्त हुआ और न्यायालय में चल रहे इन सभी प्रकरणों का स्थाई निराकरण हो गया.

आम जनता की मांग रहती है, कि उन्हें न्याय समय से मिले,  न्यायाधीशों का हमेशा से प्रयास रहा है कि न्याय की अपेक्षा में न्यायालय में उपस्थित हुआ हर एक आम नागरिक जो न्याय का हकदार है,  उसे समय पर न्याय मिले,  ``JUSTICE DELAY JUSTICE DENIED`` इस पॉलिसी पर महत्वपूर्ण रूप से न्यायाधीशों के द्वारा एकजुट होकर हर वर्ष लगभग 4 से 5 लोक अदालतों का आयोजन किया जाता है,  जिसमें लंबे समय से न्याय की अभिलाषा में न्यायालय में आने वाले न्याय आश्रितों को 1 दिन में न्याय आदेश प्राप्त हो जाता है,  न्यायपालिकाओं  के द्वारा न्याय तंत्र में लोक अदालत जैसी पॉलिसी चालू की गई  है,  जो  अपने आप में एक सराहनीय कदम है,  जिन्होंने भारत देश की जनता पर हमेशा से भरोसा कायम रखा है,  और लोक अदालत के आयोजनों के माध्यम से पीड़ित पक्षों को जब न्याय प्राप्त होता है,  तो उनका भरोसा अंतिम रूप से न्यायालय पर ही आकर ठहरता है,

जिला भोपाल से किन्नर "संजना सिंह राजपूत" ,  जिन्होंने आज की नेशनल लोक अदालत में बतौर सोशल वर्कर न्याय खंडपीठ में सम्माननीय न्यायाधीशो के साथ बैठ कर प्रकरणों का निराकरण हेतु महत्वपूर्ण सहयोग किया.... साथ ही इनके अलावा नेशनल लॉ यूनिवर्सिटी भोपाल, कैरियर कॉलेज ऑफ लॉ तथा राजीव गांधी लॉ कॉलेज भोपाल भारती विद्यापीठ पुणे के विधि छात्र छात्राओं ने भी इसी प्रकार खंडपीठ के सदस्य के रूप में प्रकरणों का निराकरण किया।








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